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नैनीताल श्री राम सेवक सभा द्वारा 16 सितंबर से 124 वॉ मां नंदा सुनंदा महोत्सव का आयोजन किया जायेगा  

कदली वृक्ष के नगर भ्रमण से शुरू होगी महोत्सव की परंपरा, 19 सितंबर को मां नंदा-सुनंदा की प्राण प्रतिष्ठा; 23 सितंबर को डोला भ्रमण के साथ होगा समापन

रिपोर्ट गुड्डू सिँह ठठोला 

नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक 124वां नंदा देवी महोत्सव 16 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। श्री राम सेवक सभा की ओर से आयोजित होने वाले इस आठ दिवसीय महोत्सव की तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। आयोजन समिति ने पत्रकार वार्ता कर महोत्सव की विस्तृत रूपरेखा साझा की। बताया गया कि इस बार का आयोजन अगले वर्ष होने वाले 125वें नंदा देवी महोत्सव की भव्य तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

महोत्सव का शुभारंभ 16 सितंबर को श्री राम सेवक सभा परिसर से होगा। उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के शामिल होने की संभावना है। इसी दिन मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं के निर्माण में प्रयोग होने वाले पवित्र कदली वृक्ष (केले के पेड़) के लिए एक दल मंगोली के लिए रवाना होगा।

इसके बाद 17 सितंबर को कदली वृक्ष को मंगोली से नैनीताल लाया जाएगा। तल्लीताल स्थित वैष्णो देवी मंदिर से कदली वृक्ष का नगर भ्रमण कराया जाएगा। नगर भ्रमण के दौरान विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं, सांस्कृतिक दल और कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को प्रदर्शित करेंगे। आयोजन में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले सांस्कृतिक दल भी हिस्सा लेंगे।

नगर भ्रमण के बाद श्री राम सेवक सभा परिसर में कदली वृक्ष से मां नंदा और सुनंदा की प्रतिमाओं का पारंपरिक विधि-विधान से निर्माण किया जाएगा। 19 सितंबर को मां नंदा-सुनंदा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी, जिसके बाद श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए प्रतिमाओं को स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही नैनीताल में धार्मिक आस्था का यह प्रमुख पर्व अपने चरम पर पहुंचेगा।

आठ दिन तक चलने वाले महोत्सव का 23 सितंबर को समापन होगा। समापन अवसर पर मां नंदा-सुनंदा का पारंपरिक डोला नगर भ्रमण करेगा। इसके बाद विधि-विधान और भावपूर्ण माहौल के बीच मां भगवती को कैलाश के लिए विदा किया जाएगा।

आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि महोत्सव के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन, नगर पालिका सहित विभिन्न विभागों के साथ समन्वय किया जा रहा है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा तथा अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी संबंधित विभागों के साथ तैयारियां की जा रही हैं।

समिति के अनुसार इस वर्ष का आयोजन आगामी 125वें नंदा देवी महोत्सव के लिए एक तरह से रिहर्सल के रूप में भी देखा जा रहा है। अगले वर्ष महोत्सव के 125वें संस्करण को और अधिक भव्य एवं व्यापक स्तर पर आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

नंदा देवी महोत्सव नैनीताल के लिए केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि कुमाऊं की लोक आस्था और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण पर्व है। मां नंदा को यहां कुलदेवी के साथ-साथ बेटी के रूप में भी पूजा जाता है।

महोत्सव के दौरान मां नंदा और सुनंदा का पूरे श्रद्धाभाव से पूजन किया जाता है और समापन पर उन्हें बेटी की तरह भावुक विदाई देकर कैलाश के लिए रवाना किया जाता है।

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