रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक 20-25 मिनट में सफर; एकतरफा किराया 375 रुपये प्रस्तावित
काठगोदाम/नैनीताल। काठगोदाम से नैनीताल के हनुमानगढ़ी और कैंची धाम को रोपवे से जोड़ने की महत्वाकांक्षी परियोजना को गति देने के लिए बुधवार को काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। प्रमुख सचिव ऊर्जा, नियोजन, सिंचाई एवं लघु सिंचाई डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में हुई बैठक में परियोजना की प्रगति, तकनीकी पहलुओं, स्टेशन निर्माण, पार्किंग और वन भूमि हस्तांतरण सहित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में काठगोदाम और ज्योलीकोट से कैंची धाम को भी रोपवे नेटवर्क से जोड़ने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों के अनुसार हल्द्वानी से नैनीताल तक का पर्वतीय क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील है। ऐसे में परियोजना के तकनीकी अध्ययन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तकनीकी अध्ययन पूरा होने के बाद आगे की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
14.9 किलोमीटर लंबा होगा काठगोदाम-नैनीताल रोपवे
बैठक में एनएचएलएमएल के प्रोजेक्ट मैनेजर ने प्रस्तावित परियोजना का प्रस्तुतिकरण किया। उन्होंने बताया कि काठगोदाम-नैनीताल रोपवे की कुल लंबाई लगभग 14.9 किलोमीटर प्रस्तावित है। रोपवे मार्ग में कुल 58 टावर स्थापित किए जाने की योजना है।
परियोजना के तहत पांच प्रमुख स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें—
काठगोदाम
रानीबाग
भुजियाघाट
ज्योलीकोट

हनुमानगढ़ी
शामिल हैं।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक रोपवे की यात्रा लगभग 20 से 25 मिनट में पूरी होने का अनुमान है। इस मार्ग पर एकतरफा किराया लगभग 375 रुपये प्रति व्यक्ति प्रस्तावित किया गया है। रोपवे की क्षमता करीब 1,800 यात्रियों प्रति घंटे की बताई गई है।
ज्योलीकोट बनेगा कैंची धाम के लिए जंक्शन
परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में ज्योलीकोट स्टेशन को जंक्शन स्टेशन के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। यहां से कैंची धाम के लिए अलग रोपवे कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी। इससे नैनीताल जाने वाले पर्यटकों के साथ-साथ कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को भी वैकल्पिक परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
बैठक में यह भी तय किया गया कि काठगोदाम से कैंची धाम को जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए तकनीकी अध्ययन और भौगोलिक परिस्थितियों का आकलन किया जाएगा।
काठगोदाम रेलवे स्टेशन से रोडवेज तक बनेगा फुट ओवर ब्रिज
रोपवे परियोजना को केवल स्टेशन निर्माण तक सीमित न रखते हुए यात्रियों की कनेक्टिविटी और सुविधाओं को भी योजना में शामिल किया गया है। इसके तहत काठगोदाम रेलवे स्टेशन से रोडवेज परिसर तक लगभग 250 मीटर लंबा फुट ओवर ब्रिज बनाने की योजना है।
इसके अलावा काठगोदाम और आसपास के क्षेत्रों में पार्किंग विकसित करने का भी प्रस्ताव है, ताकि रोपवे शुरू होने के बाद बढ़ने वाले पर्यटक और यात्री दबाव को व्यवस्थित किया जा सके।
रानीबाग में करीब 33 एकड़ भूमि पर पार्किंग की योजना
बैठक के बाद प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने अधिकारियों के साथ रानीबाग में प्रस्तावित रोपवे स्टेशन स्थल का निरीक्षण भी किया। उन्होंने बताया कि रानीबाग क्षेत्र में लगभग 33 एकड़ भूमि उपलब्ध है। इस क्षेत्र का उपयोग स्टेशन के साथ-साथ पार्किंग जैसी यात्री सुविधाओं के विकास के लिए किया जा सकता है।
पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था होने से नैनीताल की ओर जाने वाले निजी वाहनों का कुछ दबाव शुरुआती स्टेशन स्तर पर ही नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश
बैठक में परियोजना से जुड़े वन भूमि हस्तांतरण के मामलों पर भी चर्चा हुई। प्रमुख सचिव ने संबंधित अधिकारियों को वन भूमि हस्तांतरण से जुड़ी आवश्यक कार्यवाही शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने एनएचएलएमएल और संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ परियोजना को आगे बढ़ाने को कहा।
उन्होंने पर्वतीय क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं का गंभीरता से अध्ययन करने पर भी जोर दिया।
हनुमानगढ़ी में यातायात दबाव नियंत्रित करने पर जोर
नैनीताल के हनुमानगढ़ी स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रमुख सचिव ने यहां यातायात प्रबंधन की समुचित योजना तैयार करने के निर्देश दिए। स्टेशन के आसपास पार्किंग, वाहनों की आवाजाही और यात्रियों के आवागमन को व्यवस्थित रखने के लिए पहले से योजना बनाने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार रोपवे शुरू होने के बाद नैनीताल जाने वाले पर्यटकों को सड़क मार्ग के अलावा एक वैकल्पिक परिवहन साधन उपलब्ध होगा। इससे पर्यटन सीजन में सड़क पर वाहनों की संख्या और पार्किंग की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
हल्द्वानी-काठगोदाम के पर्यटन और होटल कारोबार को भी लाभ की उम्मीद
बैठक में प्रमुख सचिव ने कहा कि रोपवे परियोजना से हल्द्वानी, काठगोदाम और रानीबाग के होटल एवं पर्यटन कारोबार को भी लाभ मिलने की संभावना है। पर्यटकों को पर्वतीय क्षेत्र में पहुंचने के लिए एक नया और सुविधाजनक परिवहन विकल्प मिलेगा।
परियोजना के जरिए काठगोदाम-नैनीताल के साथ कैंची धाम को जोड़ने की योजना पूरी होने पर क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। हालांकि परियोजना के आगे के चरण तकनीकी अध्ययन, आवश्यक अनुमतियों और भूमि संबंधी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही आगे बढ़ेंगे।
काठगोदाम से नैनीताल और कैंची धाम को जोड़ने वाली यह प्रस्तावित रोपवे परियोजना पूरी होने पर कुमाऊं के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों के बीच परिवहन कनेक्टिविटी को नया स्वरूप दे सकती है।






