ब्रेकिंग न्यूज़
NEET-UG फर्जीवाड़े में SIT की बड़ी कार्रवाई, एक और आरोपी गिरफ्तार; रुपये बरामदउत्तराखंड में 2027 से पहले BJP का बड़ा संगठनात्मक बदलाव, राम माधव प्रभारी तो बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन सहप्रभारी; चुनावी रणनीति को मिलेगी नई धारएमबीपीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव को लेकर प्रशासन अलर्ट, प्रत्याशियों के साथ बैठक में सख्त चेतावनीउत्तराखंड के विधायक के फार्म हाउस में युवती से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप, दारोगा समेत चार गिरफ्तारमाँ नंदा-सुनंदा महोत्सव की सफल एवं सुरक्षित व्यवस्थाओं पर नैनीताल पुलिस का सम्मान; श्री राम सेवक सभा, मंदिर समिति ने नैनीताल पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को किया सम्मानित

फ्रीडम फाइटर कोटे से MBBS में दाखिले के नाम पर कमीशन लेने का आरोप, पहले गिरफ्तार आरोपित की निशानदेही पर बरामद हुए थे 8 लाख रुपये

देहरादून। उत्तराखंड में NEET-UG 2025 के तहत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर MBBS में दाखिला दिलाने के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को एक और बड़ी सफलता मिली है। एसआईटी ने मामले में मध्य प्रदेश के भोपाल निवासी धीरज कुमार श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी की कार की तलाशी के दौरान 5 लाख 58 हजार 100 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, यह रकम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से कुछ अभ्यर्थियों को MBBS में प्रवेश दिलाने के एवज में कमीशन के रूप में दी गई थी।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) परमेंद्र सिंह डोबाल ने गुरुवार को अपने कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेंटाउन थानों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने के संबंध में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। मामला गंभीर होने के कारण पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम का गठन किया गया।

दस्तावेजों की जांच में सामने आया फर्जीवाड़ा

एसआईटी ने जांच आगे बढ़ाते हुए संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों और शिक्षण संस्थानों से जुड़े रिकॉर्ड को कब्जे में लिया। जांच के दौरान अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते संदिग्ध पाए गए। शिक्षण संस्थानों से प्राप्त अभिलेखों की जांच के बाद उनके वास्तविक पतों की जानकारी पुलिस के सामने आई।

जांच में पुलिस को फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और उनके आधार पर MBBS में प्रवेश दिलाने से जुड़े अहम साक्ष्य मिले। इससे पहले पुलिस ने 21 सितंबर को रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया था। रूपेश पंडित की निशानदेही पर मेरठ स्थित उसके घर से फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराने के एवज में लिए गए 8 लाख रुपये भी बरामद किए गए थे।

भोपाल से गिरफ्तार हुआ धीरज श्रीवास्तव

जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने धीरज कुमार श्रीवास्तव को भोपाल से गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसकी कार की तलाशी ली, जिसमें 5,58,100 रुपये नकद मिले।

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में धीरज ने बताया कि यह रकम उसे रूपेश पंडित ने फ्रीडम फाइटर कोटे से कुछ छात्रों को MBBS में प्रवेश दिलाने के एवज में कमीशन के तौर पर दी थी। पुलिस अब इस रकम के स्रोत और पूरे लेन-देन से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

‘MBBS वे’ नाम से कार्यालय चलाता था आरोपी

पुलिस के मुताबिक, धीरज श्रीवास्तव भोपाल के इंद्रपुरी क्षेत्र में ‘एमबीबीएस वे’ नाम से कार्यालय संचालित करता था। आरोप है कि वह विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में MBBS, BTech, BCA, BBA और BCom जैसे पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिला दिलाने का काम करता था।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि धीरज की मुलाकात रूपेश पंडित से करीब दो वर्ष पहले उत्तरकाशी स्थित एक आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच लगातार संपर्क बना रहा।

तीन अभ्यर्थियों के दाखिले की जांच

एसआईटी की जांच के अनुसार, अरविंद कुमार ने अपनी पुत्री और दो परिचितों के बच्चों के MBBS में प्रवेश के लिए रूपेश पंडित से संपर्क किया था। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद धीरज और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों के लिए कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाए।

इन प्रमाण पत्रों के आधार पर तीनों अभ्यर्थियों ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में MBBS में प्रवेश लिया। अब एसआईटी इन दाखिलों, प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया, रकम के लेन-देन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

अन्य आरोपितों पर भी होगी कार्रवाई

एसआईटी ने मामले से जुड़े दस्तावेज और शिक्षण संस्थानों के रिकॉर्ड खंगालने के साथ ही आरोपितों के बीच हुए संपर्क और वित्तीय लेन-देन की भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर मामले में शामिल अन्य आरोपितों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए MBBS में दाखिले का यह मामला सामने आने के बाद अब जांच का दायरा बढ़ गया है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिलाने के इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं तथा इससे कितने अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया।

Advertisement
यह भी पढ़ें :  नैनीताल : नाव चालक और पर्यटकों में विवाद, मारपीट के बाद मॉल रोड पर मची अफरा-तफरी

You missed

❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.