देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से करीब एक साल पहले भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया है। भाजपा ने वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव को उत्तराखंड का नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है।
उनके साथ अरविंद मेनन और नई दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज को सहप्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। यह बदलाव भाजपा के राष्ट्रीय स्तर पर किए गए व्यापक संगठनात्मक फेरबदल का हिस्सा है।
राम माधव ने उत्तराखंड के प्रभारी के रूप में दुष्यंत गौतम की जगह ली है। भाजपा की ओर से की गई नियुक्तियों को 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। नई टीम के सामने प्रदेश संगठन को चुनावी मोड में सक्रिय करने, जमीनी फीडबैक मजबूत करने और विधानसभा स्तर पर संगठन की तैयारियों को गति देने की चुनौती होगी। �
राम माधव की भूमिका पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर
नई टीम में सबसे प्रमुख नाम राम माधव का है। वह 2014 से 2020 तक भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री रहे और पार्टी के संगठनात्मक एवं चुनावी कामकाज में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। भाजपा ने उन्हें उत्तराखंड के साथ तमिलनाडु का भी प्रभारी बनाया है।
राम माधव के अनुभव को देखते हुए उत्तराखंड में संगठन और चुनावी तैयारियों की नियमित समीक्षा पर जोर रहने की संभावना है। विधानसभा, मंडल और बूथ स्तर तक संगठन की स्थिति, स्थानीय मुद्दों तथा कार्यकर्ताओं से मिलने वाले फीडबैक को चुनावी तैयारियों से जोड़ना नई टीम के काम का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
यानी आने वाले समय में केवल प्रदेश संगठन की रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की जमीनी स्थिति, स्थानीय राजनीतिक समीकरण और संगठन की सक्रियता को लेकर फीडबैक जुटाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
अरविंद मेनन के सामने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की चुनौती
सहप्रभारी बनाए गए अरविंद मेनन लंबे समय से संगठनात्मक जिम्मेदारियों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में पार्टी संगठन और चुनावी गतिविधियों में काम किया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें तमिलनाडु और लक्षद्वीप की जिम्मेदारी भी दी गई थी। भाजपा की नई नियुक्तियों में उन्हें अब उत्तराखंड का सहप्रभारी बनाया गया है।
उत्तराखंड में उनकी भूमिका में बूथ और मंडल स्तर की संगठनात्मक तैयारियों पर विशेष ध्यान रह सकता है। किन विधानसभा क्षेत्रों में संगठन सक्रिय है, कहां कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है और किन क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर संगठन को और मजबूत करने की आवश्यकता है—इन पहलुओं की समीक्षा चुनावी तैयारियों का हिस्सा बन सकती है।
बांसुरी स्वराज के जरिए युवा और महिला मतदाताओं से संवाद पर जोर
नई टीम में सांसद बांसुरी स्वराज को सहप्रभारी बनाए जाने से संगठन को एक अलग आयाम मिला है। बांसुरी स्वराज वर्ष 2024 में नई दिल्ली लोकसभा सीट से 18वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुईं। वह पेशे से वकील हैं और संसद की विदेश मामलों की समिति के साथ शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी समिति की सदस्य हैं।
उत्तराखंड जैसे राज्य में युवा और महिला मतदाताओं से जुड़े मुद्दे चुनावी विमर्श का अहम हिस्सा रहते हैं। रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं, शिक्षा, स्वरोजगार, महिला सुरक्षा, आजीविका, स्वयं सहायता समूह और सरकारी योजनाओं का लाभ जैसे विषयों पर जमीनी फीडबैक जुटाना उनकी संगठनात्मक भूमिका का हिस्सा बन सकता है।
बांसुरी स्वराज की उम्र और संसदीय भूमिका को देखते हुए पार्टी के लिए युवा वर्ग के बीच संवाद का एक नया माध्यम भी तैयार हो सकता है। हालांकि उनकी वास्तविक जिम्मेदारियां और कार्य-विभाजन आने वाले दिनों में प्रदेश संगठन के स्तर पर और स्पष्ट होंगे।
2027 से पहले BJP ने बदला चुनावी कमांड स्ट्रक्चर
भाजपा ने उत्तराखंड के साथ ही देशभर के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रभारी एवं सहप्रभारियों में बदलाव किया है। पार्टी ने कुल 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नई जिम्मेदारियां घोषित की हैं। इनमें उन राज्यों पर विशेष संगठनात्मक फोकस दिखाई देता है जहां आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं।
उत्तराखंड में राम माधव, अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज की नई टीम के सामने अब अगले विधानसभा चुनाव तक संगठन को लगातार सक्रिय रखने की चुनौती होगी। आने वाले महीनों में विधानसभा स्तर पर समीक्षा बैठकें, कार्यकर्ता संवाद, बूथ मैनेजमेंट, स्थानीय मुद्दों का आकलन और संगठनात्मक कमियों की पहचान जैसे काम तेज होने की संभावना है।
नई टीम की पहली बड़ी गतिविधियों पर भी नजर रहेगी। रिपोर्ट के मुताबिक राम माधव, अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज 25 सितंबर को देहरादून पहुंचकर भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में शामिल होंगे, जहां आगामी संगठनात्मक और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा प्रस्तावित है।
इस तरह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने उत्तराखंड में अपने संगठनात्मक ढांचे में तीन अलग-अलग अनुभवों को एक टीम में जोड़ा है—राम माधव का राष्ट्रीय राजनीतिक एवं संगठनात्मक अनुभव, अरविंद मेनन का जमीनी संगठन प्रबंधन और बांसुरी स्वराज का युवा संसदीय चेहरा। अब यह टीम प्रदेश में पार्टी की चुनावी तैयारियों को किस तरह आगे बढ़ाती है, इस पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।





































