10 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई न होने से जिला ग्राम प्रधान संगठन ने 2 अक्टूबर की विशेष ग्राम सभाओं के बहिष्कार का निर्णय लिया
नैनीताल। जिला ग्राम प्रधान संगठन, नैनीताल ने ग्राम प्रधानों की 10 सूत्रीय मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई और प्रशासन के साथ संवाद न होने के विरोध में 2 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाली विशेष ग्राम सभाओं के बहिष्कार का निर्णय लिया है। संगठन का कहना है कि मांग-पत्र सौंपे जाने के बावजूद अब तक न तो कार्रवाई की जानकारी दी गई है और न ही ग्राम प्रधानों के साथ किसी स्तर पर ठोस वार्ता की गई है।
पंचायतीराज निदेशालय, उत्तराखंड की ओर से 26 सितंबर 2026 को जारी पत्र के अनुसार जन योजना अभियान (पीपीसी) 2026-27 के तहत 2 अक्टूबर को प्रदेशभर में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाना है। इन ग्राम सभाओं में ग्रामीण विकास, पंचायत सशक्तीकरण, स्वच्छता, जल संरक्षण, आजीविका और जनकल्याणकारी योजनाओं सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की जानी है। साथ ही ग्राम पंचायत विकास योजना तैयार करने तथा स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की प्राथमिकताएं निर्धारित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी क्रम में ग्राम सभाओं के सफल आयोजन के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। हालांकि, नैनीताल जिला ग्राम प्रधान संगठन ने इन बैठकों के बहिष्कार का फैसला लेकर प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की है।
24 सितंबर को किया था धरना-प्रदर्शन
जिला ग्राम प्रधान संगठन के अनुसार, 24 सितंबर 2026 को ग्राम प्रधानों ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया था। इस दौरान संबंधित अधिकारियों को मांग-पत्र सौंपकर ग्राम प्रधानों की समस्याओं के समाधान और मांगों पर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई थी।
संगठन का कहना है कि धरना-प्रदर्शन के बाद करीब एक सप्ताह का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक ग्राम प्रधानों को उनकी मांगों पर हुई कार्रवाई के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। संगठन के मुताबिक, मांगों को लेकर ग्राम प्रधानों के साथ औपचारिक वार्ता भी नहीं की गई है।
प्रधान संगठन का कहना है कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं को लागू करने की महत्वपूर्ण इकाई हैं। ग्राम प्रधानों के माध्यम से सरकार की विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों को ग्रामीणों तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में ग्राम प्रधानों की समस्याओं और मांगों पर प्रशासन की ओर से संवाद होना जरूरी है।
‘संवाद और कार्रवाई की जानकारी अपेक्षित’
जिला ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष गोपाल अधिकारी ने कहा कि ग्राम प्रधान लगातार गांवों में शासन की योजनाओं, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को धरातल पर लागू करने में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद ग्राम प्रधानों की 10 सूत्रीय मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से उनमें नाराजगी है।
उन्होंने कहा कि संगठन ने अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन किया और अधिकारियों को मांग-पत्र भी सौंपा था। इसके बाद संगठन को उम्मीद थी कि प्रशासन की ओर से मांगों पर हुई कार्रवाई से अवगत कराया जाएगा और ग्राम प्रधानों के साथ वार्ता की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
सामूहिक निर्णय के रूप में किया जाएगा बहिष्कार
गोपाल अधिकारी ने कहा कि 2 अक्टूबर को होने वाली विशेष ग्राम सभाओं का बहिष्कार संगठन का सामूहिक निर्णय है। इसका उद्देश्य लंबित 10 सूत्रीय मांगों की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना और ग्राम प्रधानों के साथ संवाद की प्रक्रिया शुरू कराना है।
उन्होंने कहा कि संगठन आगे की रणनीति भी ग्राम प्रधानों की सामूहिक सहमति से तय करेगा। यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होती है तो आने वाले दिनों में संगठन की ओर से आगे के आंदोलन को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।
मीडिया प्रभारी मनीष भट्ट, ग्राम प्रधान कमलुवागांजा मेहता ने बताया कि संगठन ग्राम प्रधानों की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहा है और मांगों के समाधान के लिए प्रशासन से संवाद की अपेक्षा रखता है।





































