नैनीताल। अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) के पेअर कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय में शोध एवं वैज्ञानिक गतिविधियों को आधुनिक संसाधनों से मजबूती मिल रही है। कार्यक्रम के तहत लगभग 2.5 करोड़ रुपये की लागत के अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरण विश्वविद्यालय को प्राप्त हुए हैं। इन उपकरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रयोगशाला आधारित अनुसंधान की आधुनिक तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
विश्वविद्यालय में उपलब्ध कराए गए प्रमुख उपकरणों में एक्स-रे डिफ्रेक्शन (एक्सआरडी), यूवी-विजिबल स्पेक्ट्रोफोटोमीटर, यूनिवर्सल टेस्टिंग मशीन (यूटीएम), फ्लोरेसेंस माइक्रोस्कोप, थर्मोग्रेविमेट्रिक एनालिसिस (टीजीए) और डिफरेंशियल स्कैनिंग कैलोरीमेट्री (डीएससी) शामिल हैं। ये उपकरण पदार्थों के संरचनात्मक, रासायनिक, भौतिक एवं तापीय गुणों के अध्ययन के साथ-साथ विभिन्न वैज्ञानिक शोध परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इन अत्याधुनिक सुविधाओं का लाभ विश्वविद्यालय के 70 से अधिक विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से मिल रहा है। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को केवल उपकरणों के बारे में सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी जा रही, बल्कि उन्हें नमूना तैयार करने, वैज्ञानिक उपकरणों का संचालन करने, प्रयोगों से डेटा प्राप्त करने तथा प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव भी कराया जा रहा है।
इसी क्रम में विश्वविद्यालय में 3 से 6 अक्टूबर तक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के शुरुआती दो दिनों में विद्यार्थियों को विभिन्न वैज्ञानिक एवं अनुसंधान तकनीकों की सैद्धांतिक जानकारी प्रदान की गई। इसके बाद अंतिम दो दिनों में विद्यार्थियों को अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों पर प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में आधुनिक अनुसंधान तकनीकों की समझ विकसित करने के साथ उन्हें उच्च स्तरीय वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में कार्य करने के लिए तैयार करना है। उपकरणों के प्रत्यक्ष संचालन और डेटा विश्लेषण का अनुभव मिलने से विद्यार्थियों की शोध क्षमता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
एएनआरएफ-पेअर कार्यक्रम के तहत उपलब्ध इन संसाधनों से विश्वविद्यालय में बहुविषयक शोध, प्रयोगात्मक अध्ययन और वैज्ञानिक नवाचार को भी गति मिलने की संभावना है। विद्यार्थियों को अत्याधुनिक उपकरणों पर प्रशिक्षण मिलने से उनके शोध कार्यों की गुणवत्ता में सुधार के साथ राष्ट्रीय स्तर की अनुसंधान परियोजनाओं में उनकी भागीदारी के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

