बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की मांग को लेकर छठे दिन भी अनिश्चितकालीन धरना जारी, श्रमिक कैंपों में पात्र व्यक्तियों की अनदेखी और बाहरी नेताओं के हस्तक्षेप पर उठे सवाल
धरने के छठे दिन इंद्रानगर द्वितीय के ग्रामीणों ने उठाई आवाज, श्रमिक कैंपों में सभी पात्रों को सामग्री देने और 32 गांवों में कैंप लगाने की मांग
लालकुआं। बिंदुखत्ता को वन अधिकार कानून के तहत राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर आंदोलन लगातार जारी है। 15 अगस्त से शुरू हुई पदयात्रा और 27 सितंबर को आयोजित महारैली के बाद 5 अक्टूबर से तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है। धरने के छठे दिन इंद्रानगर द्वितीय के ग्रामीण महेश चंद्र फुलारा के नेतृत्व में ग्रामीण धरना स्थल पर बैठे। इस दौरान वक्ताओं ने गीत-संगीत और संबोधन के माध्यम से अपनी मांगों को दोहराते हुए सरकार से बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग की। आंदोलनकारियों ने तहसीलदार लालकुआं के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा।
धरना स्थल पर बिंदुखत्ता में पंचायत अधिकारों, वन अधिकार समितियों की भूमिका और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि क्षेत्र को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन अब तक इसका समाधान नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर राजस्व ग्राम घोषित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
आंदोलन के बीच कांग्रेस नेता हरीश सुयाल की पहल पर इंडिया गठबंधन के क्रमिक अनशन और वन अधिकार संगठन के अनिश्चितकालीन धरने को एक साथ संचालित करने का प्रस्ताव भी सामने आया। इस पर दोनों पक्षों ने आपसी बातचीत के लिए शीघ्र बैठक करने पर सहमति जताई। माना जा रहा है कि दोनों आंदोलनों के बीच समन्वय स्थापित होने से राजस्व ग्राम की मांग को लेकर आंदोलन की आगामी रणनीति पर संयुक्त रूप से चर्चा की जा सकेगी।
श्रमिक कैंपों में वन अधिकार समितियों को आमंत्रित नहीं करने पर जताई नाराजगी
वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट ने कहा कि बिंदुखत्ता में पंचायत का अधिकार नहीं होने के कारण प्रशासन की देखरेख में 32 ग्रामसभाओं में वन अधिकार समितियों का निर्वाचन किया गया है। उनके अनुसार, ये समितियां विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर पेंशन स्वीकृति, परिवार रजिस्टर सहित कई कार्यों में पंचायत प्रतिनिधियों के विकल्प के रूप में भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद बिंदुखत्ता में आयोजित श्रमिक कैंपों में वन अधिकार समितियों को आमंत्रित नहीं किया जा रहा है। भट्ट ने दावा किया कि एक राजनीतिक दल विशेष से जुड़े बाहरी नेताओं द्वारा सरकारी धन से खरीदी गई सामग्री अपने कार्यकर्ताओं को वितरित की जा रही है, जबकि वास्तविक पात्र मजदूरों को सामग्री नहीं मिल पा रही है और कई लोगों के श्रमिक कार्ड भी नहीं बनाए गए हैं।
उमेश भट्ट ने कहा कि निर्वाचित सांसद और विधायक सरकारी योजनाओं से संबंधित कार्यक्रमों में शामिल हों, तो संगठन को कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उन्होंने बिंदुखत्ता में बाहरी राजनीतिक लोगों के हस्तक्षेप पर विरोध जताते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक निष्पक्ष तरीके से पहुंचना चाहिए।
जिलाधिकारी को ज्ञापन देने की घोषणा, 32 गांवों में कैंप लगाने की मांग
वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष ने घोषणा की कि श्रमिक कैंपों में सामग्री वितरण से संबंधित शिकायतों को लेकर सोमवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि जिलाधिकारी मामले का संज्ञान लेकर सभी पात्र व्यक्तियों को सामग्री वितरित कराने की व्यवस्था नहीं करते हैं, तो वन अधिकार समितियां पेंशन से जुड़े अन्य कार्य भी नहीं करेंगी।
भट्ट ने मांग की कि बिंदुखत्ता के सभी 32 गांवों में अलग-अलग श्रमिक कैंप आयोजित किए जाएं, ताकि प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में होने वाली प्रत्येक सरकारी गतिविधि की सूचना वन अधिकार समितियों को दी जाए और संबंधित कार्यक्रमों में उन्हें आमंत्रित किया जाए।
इसके साथ ही उन्होंने सरकारी योजनाओं के तहत सामग्री वितरण में बाहरी राजनीतिक नेताओं के अनावश्यक हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना था कि सरकारी योजनाओं का संचालन पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और किसी भी पात्र व्यक्ति को राजनीतिक कारणों से लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
धरना स्थल पर वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, समिति अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, इंदिरानगर हाथीखाल के संयोजक महेश चंद्र फुलारा, कैप्टन खुशाल सिंह कोश्यारी, दीपक जोशी, भूपेश जोशी, कविराज धामी, नवीन जोशी, दीपक पाठक, जीवन पांडे, ममता बिष्ट, संध्या डालाकोटी, गोविंद गिरी, दौलत सिंह कोरंगा, हरीश सुयाल, पूरन लोहनी, बिशन सिंह पपोला, मोहन राम, धन गिरी गोस्वामी, पार्वती देवी भट्ट और गंगा देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। अब सभी की निगाहें प्रशासन और शासन की ओर हैं कि ग्रामीणों की मांगों तथा श्रमिक कैंपों से संबंधित शिकायतों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

