कालाढूंगी में अंकिता भंडारी केस में वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने और दुष्यंत गौतम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति के विरोध में मशाल जुलूस निकाला गया
रिपोर्टर – नीरज तिवारी
कालाढूंगी। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर न्याय की मांग लगातार तेज होती जा रही है। मामले में निष्पक्ष जांच, कथित वीआईपी की पहचान सार्वजनिक करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदेशभर में विरोध के स्वर उठ रहे हैं। इसी क्रम में कालाढूंगी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं, युवाओं और स्थानीय महिलाओं ने मशाल जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग उठाई।
कांग्रेस नगर अध्यक्ष रोहित बुढलाकोटि के नेतृत्व में निकाले गए मशाल जुलूस में बड़ी संख्या में युवा, पार्टी कार्यकर्ता और महिलाएं शामिल हुईं। हाथों में मशाल लेकर प्रदर्शनकारी कालाढूंगी के मुख्य मार्गों और बाजार क्षेत्र से गुजरे। इस दौरान अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने, हत्याकांड से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने की मांग
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और जांच के दायरे में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की निष्पक्षता से पड़ताल हो। उनका कहना था कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए जरूरी है कि मामले से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आए और किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को जांच से बाहर न रखा जाए।
प्रदर्शनकारियों ने जांच प्रक्रिया को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि मामले में प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मांग की कि जांच में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर भी जताया विरोध
मशाल जुलूस के दौरान भाजपा के तत्कालीन प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम का नाम लेकर भी विरोध जताया गया। प्रदर्शनकारियों ने उनकी सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए और नियुक्ति रद्द करने की मांग की। उनका कहना था कि अंकिता भंडारी प्रकरण में उठ रहे सवालों का निष्पक्ष तरीके से समाधान होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति के पद या राजनीतिक प्रभाव के कारण जांच प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
प्रदर्शन में शामिल युवाओं और महिलाओं ने कहा कि उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को स्पष्ट किया जाए, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाए।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। मशाल जुलूस के माध्यम से उन्होंने सरकार तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया कि अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर जनता में आक्रोश बना हुआ है और न्याय की मांग लगातार उठती रहेगी।
कालाढूंगी में निकाले गए इस मशाल जुलूस के जरिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने, कथित वीआईपी से जुड़े सवालों का जवाब सामने लाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग दोहराई।
इस दौरान रोहित बुधलाकोटि, अर्णव कंबोज, दीप सती, नीरज तिवारी, सुआस्तिक उपाध्याय, संजय किरौला, पीयूष बिष्ट, कमल अधिकारी, सरताज फारूखी, सलमान वारसी,रानी जी आदि लोग उपस्थित थे।

