सेवानिवृत्त IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी और पहाड़ी आर्मी के संस्थापक हरीश रावत ने प्रेस वार्ता में रखी आंदोलन की रूपरेखा, 25 अक्टूबर को हरीश रावत स्वयं बैठेंगे अनशन पर
हल्द्वानी। उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने की मांग को लेकर पहाड़ी आर्मी ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। हल्द्वानी में आयोजित प्रेस वार्ता में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी और पहाड़ी आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत ने राजधानी के मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए आंदोलन की रूपरेखा सामने रखी। उन्होंने बताया कि आगामी 18 अक्टूबर से हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। आंदोलन के जरिए गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने, पहाड़ों में विकास को गति देने और पलायन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
26 साल बाद भी स्थायी राजधानी का इंतजार: रतूड़ी
प्रेस वार्ता में सेवानिवृत्त IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से ही स्थायी राजधानी का मुद्दा लगातार उठता रहा है, लेकिन आज तक इस दिशा में ठोस निर्णय नहीं हो पाया है। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 2 और 3 का उल्लेख करते हुए राजधानी के सवाल पर अपनी बात रखी और कहा कि वर्ष 2000 से अब तक इस मांग को लेकर 106 दिन तक धरने दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद स्थायी राजधानी का सवाल अनसुलझा बना हुआ है।
रतूड़ी ने कहा कि अब इस मुद्दे को लेकर आंदोलन को नए सिरे से आगे बढ़ाया जाएगा। इसी क्रम में 18 अक्टूबर से हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन शुरू होगा। उन्होंने बताया कि आंदोलन में राज्य आंदोलनकारियों, अधिवक्ताओं और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी रहेगी, ताकि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को व्यापक समर्थन मिल सके।
18 अक्टूबर से शुरू होगा क्रमिक अनशन, 25 को हरीश रावत बैठेंगे
आंदोलन की घोषित रूपरेखा के अनुसार, 18 अक्टूबर को अनिल बहुगुणा अनशन पर बैठेंगे, जबकि 20 अक्टूबर को विजय कंडारी सहित अन्य लोग आंदोलन में शामिल होंगे। इसके बाद 25 अक्टूबर को पहाड़ी आर्मी के संस्थापक अध्यक्ष हरीश रावत स्वयं अनशन पर बैठेंगे।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल राजधानी के मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पहाड़ों के विकास, क्षेत्रीय असंतुलन, पलायन और उत्तराखंड की मूल अवधारणा से जुड़े सवालों को भी उठाएगा। उनका कहना है कि राज्य गठन के करीब 26 वर्ष बाद भी स्थायी राजधानी का निर्णय न होना पहाड़ की जनता की अपेक्षाओं से जुड़ा गंभीर विषय है।
परिसीमन को लेकर जताई चिंता, पहाड़ के प्रतिनिधित्व पर उठाए सवाल
विनोद प्रसाद रतूड़ी ने परिसीमन के मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों का संतुलन मैदान की ओर चला गया, तो पहाड़ों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि 105 में से 71 सीटें मैदान में चली जाने की स्थिति बन सकती है और इससे पहाड़ों के हाथ से सत्ता निकलने का खतरा पैदा होगा।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और पहाड़ी क्षेत्रों की विशिष्ट समस्याओं को ध्यान में रखते हुए राजधानी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग पहाड़ों की पहचान और वहां के संतुलित विकास से भी जुड़ी है।
हरीश रावत ने कहा कि यदि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया गया होता, तो पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े संस्थानों और विकास परियोजनाओं की संभावनाएं बढ़ सकती थीं। उन्होंने AIIMS और अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम जैसे संस्थानों का उल्लेख करते हुए हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला और बिलासपुर का उदाहरण दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े संस्थान विकसित हो सकते हैं, तो उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में विकास की वैसी संभावनाओं को क्यों नहीं साकार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि स्थायी राजधानी का मुद्दा केवल प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विकास से भी जुड़ा हुआ है।
पलायन और उजड़ते गांवों का मुद्दा भी आंदोलन में उठेगा
हरीश रावत ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और राज्य गठन के उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि देवभूमि को धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की संभावनाओं के अनुरूप विकास नहीं हो पाया और पहाड़ों से पलायन लगातार चिंता का विषय बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी गांवों का खाली होना, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव ऐसे सवाल हैं, जिन पर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है। उनके मुताबिक, गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग के साथ इन समस्याओं को भी आंदोलन के केंद्र में रखा जाएगा।
हल्द्वानी से आंदोलन को व्यापक बनाने की तैयारी
पहाड़ी आर्मी ने बुद्ध पार्क में प्रस्तावित अनशन के जरिए गैरसैंण राजधानी के मुद्दे को फिर से सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में लाने की बात कही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि राज्य की स्थायी राजधानी का फैसला पहाड़ों की भौगोलिक परिस्थितियों, जनभावनाओं और विकास की जरूरतों को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
हरीश रावत ने विश्वास जताया कि पहाड़ों से पलायन और उजड़ते गांवों के दर्द को सामने रखने वाला यह आंदोलन सफल होगा। अब सभी की निगाहें 18 अक्टूबर से शुरू होने वाले क्रमिक अनशन और आगामी दिनों में इसमें शामिल होने वाले राज्य आंदोलनकारियों, अधिवक्ताओं तथा जनप्रतिनिधियों की भागीदारी पर रहेंगी।

