कालाढूंगी में रावण दहन के साथ हुआ रामलीला मंचन का समापन

13 दिवसीय रामलीला का विजयदशमी पर हुआ समापन, श्रीराम-रावण युद्ध के मंचन ने मोहा दर्शकों का मन

रिपोर्टर – नीरज तिवारी

कालाढूंगी। बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक विजयदशमी का पर्व कालाढूंगी में बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कालाढूंगी के रामलीला मैदान में आयोजित 13 दिवसीय रामलीला मंचन का समापन हुआ।

रामलीला के अंतिम दिन भगवान श्रीराम और लंकापति रावण के बीच हुए भीषण युद्ध का जीवंत मंचन किया गया। स्थानीय कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से युद्ध के दृश्यों को इस तरह प्रस्तुत किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। पूरे मैदान में मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

रामलीला के अंतिम दिन रावण और भगवान श्रीराम के बीच हुए युद्ध के दृश्य ने दर्शकों को रामायण के प्रसंगों से रूबरू कराया। युद्ध के दौरान भगवान श्रीराम ने अहंकारी रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। इसके बाद रामलीला कमेटी की ओर से तैयार किए गए 40 फीट ऊंचे रावण के विशाल पुतले का दहन किया गया। भगवान श्रीराम के स्वरूप ने अग्निबाण चलाकर रावण के पुतले को आग के हवाले किया। पुतले में आग लगते ही पूरा रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।

रावण दहन देखने के लिए मैदान में हजारों की संख्या में दर्शक मौजूद रहे। पुतला दहन के दौरान हुई आतिशबाजी से आसमान जगमगा उठा और पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल दिखाई दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने विजयदशमी के इस आयोजन का आनंद लिया। रामलीला के समापन के साथ ही क्षेत्र में पर्व की रौनक देखने को मिली।

विजयदशमी के आयोजन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। रामलीला मैदान में पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें तैनात रहीं। रावण के विशाल पुतले के दहन और आतिशबाजी के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने व्यवस्थाओं पर नजर रखी, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश

रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कमल सती और महासचिव हरीश मेहरा ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विजयदशमी के अवसर पर 40 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। उन्होंने कहा कि रावण दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि समाज को सत्य, धर्म और अच्छाई के मार्ग पर चलने का संदेश देने वाला आयोजन है। यह पर्व हमें सिखाता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः जीत सत्य और धर्म की ही होती है।

उन्होंने बताया कि कालाढूंगी की रामलीला का इतिहास काफी पुराना है। इस सांस्कृतिक परंपरा को जीवित रखने के लिए स्थानीय कलाकार और रामलीला कमेटी के पदाधिकारी हर वर्ष पूरी मेहनत और समर्पण के साथ आयोजन करते हैं। रामलीला के मंचन में कलाकारों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है, वहीं आयोजन को सफल बनाने के लिए कमेटी के सदस्य भी लगातार प्रयास करते हैं।

कमेटी के पदाधिकारियों ने रामलीला मंचन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी कलाकारों, कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया। साथ ही सभी को विजयदशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनता के सहयोग से इस वर्ष का 13 दिवसीय रामलीला आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

कालाढूंगी में विजयदशमी के अवसर पर हुए रावण दहन के साथ ही एक बार फिर भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश जन-जन तक पहुंचा।

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