धामी कैबिनेट के समांतर हल्द्वानी में बैठी ‘सांकेतिक सरकार’: बुद्ध पार्क में बनी ‘कैबिनेट’, गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित करने का प्रस्ताव पास, हरीश रावत बने CM
हल्द्वानी। उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण को घोषित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। गैरसैंण में सरकार की दो दिवसीय कैबिनेट बैठक और विधानसभा सत्र के दौरान जहां राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं, वहीं हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ अनूठे अंदाज में विरोध दर्ज कराया। यहां प्रदर्शनकारियों ने सरकार की कैबिनेट बैठक के समानांतर एक ‘सांकेतिक कैबिनेट’ का आयोजन कर गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया।
बुद्ध पार्क में आयोजित इस सांकेतिक कैबिनेट बैठक में पहाड़ी आर्मी के संस्थापक हरीश रावत को सांकेतिक मुख्यमंत्री बनाया गया, जबकि आंदोलन से जुड़े अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं को मंत्रियों की जिम्मेदारी सौंपी गई। बैठक के लिए बाकायदा मेज-कुर्सियां लगाई गईं। सभी सांकेतिक मंत्रियों ने उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी टोपी पहनकर बैठक में हिस्सा लिया और प्रदेश की राजधानी से जुड़े मुद्दे पर चर्चा की।
आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की है कि गैरसैंण को केवल ग्रीष्मकालीन राजधानी तक सीमित रखने के बजाय इसे उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित किया जाए। उनका मानना है कि गैरसैंण राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, पर्वतीय क्षेत्रों के विकास और राज्य आंदोलन की भावनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र है।
कांग्रेस और भाजपा दोनों पर उठाए सवाल
सांकेतिक मुख्यमंत्री बने पहाड़ी आर्मी के संस्थापक हरीश रावत ने कहा कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिए वर्षों से आंदोलन चल रहा है। प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा दोनों की सरकारें सत्ता में आईं, लेकिन किसी भी सरकार ने इस मांग को पूरा नहीं किया।
बुद्ध पार्क में दिनभर चर्चा का विषय बनी सांकेतिक कैबिनेट
हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में आयोजित यह सांकेतिक कैबिनेट बैठक अपने अनूठे स्वरूप के कारण चर्चा का केंद्र बनी रही। एक ओर गैरसैंण में सरकार की आधिकारिक बैठक और विधानसभा सत्र चल रहा था, तो दूसरी ओर हल्द्वानी में आंदोलनकारी अपनी अलग कैबिनेट के माध्यम से सरकार के सामने अपनी मांग रख रहे थे।
आंदोलनकारियों ने इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का सवाल केवल राजनीतिक घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की जनता की भावनाओं और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास से भी जुड़ा हुआ है।
फिलहाल, स्थायी राजधानी की मांग को लेकर हल्द्वानी में जारी अनशन और धरना-प्रदर्शन के बीच आंदोलनकारियों की नजर सरकार के रुख पर टिकी है।
अब देखना होगा कि सरकार इस मांग को लेकर क्या कदम उठाती है और लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।

