नवंबर में शुरू होगा बर्फबारी का दौर! पहाड़ों में बारिश के साथ गिरेगा तापमान, मैदानी इलाकों में भी बढ़ेगी ठिठुरन

पहाड़ों पर बिछेगी बर्फ की सफेद चादर! जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में मौसम बदलने के संकेत

देहरादून। उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने के संकेत मिल रहे हैं। नवंबर के दूसरे सप्ताह की शुरुआत के आसपास जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के साथ उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई जा रही है। मौसम में संभावित बदलाव के चलते पहाड़ी इलाकों में ठंड बढ़ने के आसार हैं। हालांकि 10 नवंबर को लेकर अभी तक मौसम विभाग की ओर से कोई पुख्ता आधिकारिक बुलेटिन सामने नहीं आया है। ऐसे में मौसम परिवर्तन की इस संभावना को फिलहाल संभावित पूर्वानुमान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

नवंबर का महीना हिमालयी क्षेत्रों में सर्दियों की शुरुआत का समय माना जाता है। इस दौरान पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने पर पहाड़ों में बादल छाने, बारिश होने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की परिस्थितियां बनती हैं। इस बार भी मौसम में इसी तरह के बदलाव की संभावना को लेकर चर्चा तेज है। यदि पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी होता है तो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी देखने को मिल सकती है।

पर्यटन नगरी मसूरी और नैनीताल में भी ठंड बढ़ने की संभावना है। हालांकि इन क्षेत्रों में बर्फबारी होगी या नहीं, यह पूरी तरह मौसम प्रणाली की सक्रियता और तापमान पर निर्भर करेगा। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने से निचले इलाकों में भी सर्द हवाओं का प्रभाव बढ़ सकता है।

जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में भी बदलेगा मौसम

जम्मू-कश्मीर में मौसम परिवर्तन की संभावना के बीच कश्मीर घाटी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है, जबकि निचले इलाकों में बारिश होने के आसार हैं। गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग जैसे पर्यटन स्थलों पर बर्फबारी की संभावना पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

वहीं हिमाचल प्रदेश के शिमला, मनाली, डलहौजी और किन्नौर सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी मौसम करवट ले सकता है। लद्दाख में पहले से ही तापमान काफी कम बना हुआ है। ऐसे में मौसम में बदलाव के साथ यहां बर्फबारी और ठंड का असर और अधिक बढ़ सकता है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागरीय क्षेत्र से नमी लेकर उत्तर भारत की ओर आने वाली मौसमी प्रणाली है। जब यह हिमालयी क्षेत्रों तक पहुंचती है तो पहाड़ों में बादल बनते हैं और परिस्थितियों के अनुकूल होने पर बारिश तथा बर्फबारी होती है। ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान कम होने के कारण ऊंचे पहाड़ों पर बारिश बर्फ के रूप में गिरती है। नवंबर में इसी प्रक्रिया के चलते हिमालयी क्षेत्रों में सर्दियों की पहली बर्फबारी देखने को मिलती है।

पहाड़ों की यात्रा करने वाले पर्यटक बरतें सावधानी

मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए नवंबर में पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। यात्रा पर निकलने से पहले मौसम विभाग की ताजा जानकारी और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी जरूर देखनी चाहिए। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अचानक मौसम बदलने, सड़क पर फिसलन बढ़ने और बर्फबारी के कारण यातायात प्रभावित होने की आशंका रहती है।

पर्यटकों को गर्म कपड़े, जरूरी दवाइयां और अन्य आवश्यक सामान साथ रखने चाहिए। बर्फबारी के दौरान वाहन चलाते समय विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

फिलहाल 10 नवंबर के आसपास मौसम में संभावित बदलाव को लेकर नजरें मौसम विभाग के आगामी पूर्वानुमान पर टिकी हैं। यदि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है तो पहाड़ों में बर्फबारी के साथ सर्दियों का असर और तेज हो सकता है। हालांकि अंतिम स्थिति मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनी और अपडेट से ही स्पष्ट होगी।

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