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मानसून की आहट और प्री-मॉनसून की बारिश ने आदि कैलास यात्रा के उत्साह को कम किया है। यात्रियों की संख्या में पहले की तुलना में 50 प्रतिशत की कमी आई है। इससे पर्यटन कारोबारियों को भी कारोबार धीमा पड़ने से निराश होना पड़ रहा है।
इस बार मई से अब तक लगातार आदि कैलास यात्रा मार्ग पूरी तरह से खुला रखने में बीआरओ कामयाब रहा है। जिसका असर यहां पर्यटन कारोबार में साफ दिखा है।

20 हजार से अधिक यात्री भगवान शिव के धाम पहुंचकर आदि कैलास पर्वत व पार्वती सरोवर के दर्शन कर चुके हैं।

पवित्र ओम पर्वत के दर्शन करने वाले यात्रियों की संख्या भी इतनी ही रही है। औसत रोज 500 से 1 हजार तक लोग दर्शन को इस बीच शिवधाम पहुंच रहे थे । इधर पिछले एक सप्ताह से प्री मानसून की यहां रोज

हो रही बारिश के बाद आदि कैलास जाने वालों की संख्या 250 से भी कम पहुंच गई है। बारिश के बाद सड़क बंद हुई तो यह संख्या और कम हो सकती है।

एनएच बंद होने की फिक्र से कम आ रहे हैं यात्री
हिमालयी क्षेत्र में मानसून की बारिश व उससे होने वाले नुकसान की आशंका से घबराए लोग अब यात्रा पर जाने से परहेज कर रहे हैं।

यहीं कारण है कि पर्यटकों से गुलजार व्यास घाटी में गुंजी से ज्योलिंकांग तक यात्रियों की चहल पहल कम हुई है। तवाघाट लिपूलेख सड़क के खतरे से भी अपना यात्रा प्लान छोड़ना पड़ रहा है।

पिछले सीजन में 45 दिन से अधिक समय तक बंद रहा था यात्रा मार्ग
पिछले यात्रा सीजन में मानसून की दस्तक से पहले ही यहां तवाघाट लिपूलेख सड़क कई जगह बंद होने से पर्यटन कारोबारी परेशान रहे।

45 दिन से अधिक समय तक इस मार्ग के बंद रहने से यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। जिससे पूरे सीजन में केवल 12 हजार यात्री ही शिवधाम दर्शन को जा सके।

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