सेना से सेवानिवृत्त अधिकारी को साइबर ठगों ने एक सप्ताह तक डिजिटल अरेस्ट रखा,  इस दौरान फर्जी सुप्रीम कोर्ट में उनके मामले की सुनवाई भी करवाई

भोपाल। डिजिटल अरेस्ट का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सेना की मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस से सेवानिवृत्त अधिकारी को साइबर ठगों ने न केवल एक सप्ताह तक अरेस्ट रखा, बल्कि इस दौरान फर्जी सुप्रीम कोर्ट में उनके मामले की सुनवाई भी करवा दी।

यहां हैरान कर देने वाला तथ्य यह है कि सुनवाई में पीड़ित की तरफ से भी एक वकील ठगों ने शामिल किया। इस दौरान आरोपितों ने ईडी की जांच के नाम पर 36 लाख रुपये ठग लिए।

13 नवंबर की सुबह 85 वर्षीय बुजुर्ग टीके नागसरकर के मोबाइलं पर साइबर ठग की पहली काल आई थी। स्वयं को दिल्ली पुलिस का अधिकारी विजय खन्ना बताकर ठग ने उनसे कहा कि उनका केनरा बैंक में जो खाता है, वह फर्जी हस्ताक्षर करके खुलवाया गया था।

उस खाते पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बुजुर्ग ने साइबर ठगों के कहे अनुसार, अपने खाते में जमा 20 लाख रुपये 15 नवंबर को जिस खाते में भेजे, वह खाता दिल्ली की एक फर्नीचर फर्म का है।

इसके बाद 19 नवंबर को जिस दूसरे खाते में 16 लाख रुपये भेजे गए, वह डिब्रूगढ़ स्थित एक बैंक का है। साइबर क्राइम सेल ठगों का पता लगाने में जुटी हुई है।

से संदिग्ध लेन-देन हुआ है। बुजुर्ग ने आरोपों से इन्कार किया तो ठग ने कहा कि उनका मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, इसलिए बेगुनाही साबित करने के लिए उन्हें कोर्ट की सुनवाई में शामिल होना पड़ेगा।

इसके बाद ठग ने अपने साथियों के साथ मिलकर आनलाइन कोर्ट लगाई। इसे सुप्रीम कोर्ट का नाम दिया।

इसमें जज बनाकर किसी को बैठाया गया। ईडी की अधिकारी बनाकर एक महिला ठग को पेश किया गया। फर्जी सुप्रीम कोर्ट में बुजुर्ग पर लगे आरोपों की सुनवाई की गई।

बुजुर्ग की भी पैरवी के लिए एक वकील इस कोर्ट में बताया गया। कथित रूप से जज बने ठग ने प्रकरण जांच के लिए ईडी को सौंपने का आर्डर दिया और ईडी की अधिकारी बनकर पेश हुई, जिस महिला ने अपना नाम निशा पटेल बताया, उसने कथित जज से कहा-जज साहब मैं निष्पक्ष जांच करूंगी।

फिर ईडी की जांच के नाम पर उनसे सभी खातों की सारी जमा पूंजी कुल 36 लाख रुपये ठगों के बताए दो खातों में ट्रांसफर कराई गई।

यह कहकर कि जांच के बाद सारी राशि सप्ताहभर के अंदर वापस कर दी जाएगी, लेकिन इसके बाद जब बुजुर्ग का ठगों से संपर्क टूटा और उन्हें धनराशि वापस नहीं मिली, तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद वह पुलिस के पास पहुंचे।

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