हाईकोर्ट की महिला अधिवक्ता ने मध्यप्रदेश की महिला पर जान से मारने और एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी देने का लगाया आरोप
मानहानि नोटिस के बाद व्हाट्सएप और कॉल के जरिए धमकाने का आरोप,
नैनीताल। हाईकोर्ट की महिला अधिवक्ता कनिष्का भट्ट ने मध्यप्रदेश निवासी एक महिला पर लगातार जान से मारने की धमकी देने और एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया है। अधिवक्ता के अनुसार आरोपी महिला राणी सोलंकी द्वारा उन्हें लगातार व्हाट्सएप संदेश और फोन कॉल के माध्यम से धमकाया जा रहा है। मामले को लेकर हल्द्वानी कोतवाली में आरोपी महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
अधिवक्ता कनिष्का भट्ट के मुताबिक, विवाद की शुरुआत एक मामले को लेकर हुई, जिसमें आरोपी महिला द्वारा उनके मुवक्किल को कथित तौर पर दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाने का प्रयास किया गया था। अधिवक्ता का कहना है कि इस मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और प्रकरण मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। उनके अनुसार, संबंधित मामला न्यायालयों में खारिज हो चुका है।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि इसके बाद उन्होंने आरोपी महिला को मानहानि का कानूनी नोटिस जारी किया। नोटिस जारी होने के बाद से उनके खिलाफ कथित धमकियों का सिलसिला और तेज हो गया। उनका कहना है कि उन्हें विभिन्न माध्यमों से लगातार धमकी भरे संदेश और फोन कॉल प्राप्त हो रहे हैं। इन धमकियों के चलते उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस को दी और हल्द्वानी कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई।
कनिष्का भट्ट ने बताया कि उन्हें जान से मारने की धमकी के साथ ही एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी भी दी जा रही है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गंभीरता से जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की गुहार लगाई है।
अधिवक्ता के अनुसार, हल्द्वानी कोतवाली में दर्ज एफआईआर की जांच कोतवाली प्रभारी निरीक्षक द्वारा की जा रही है। पुलिस द्वारा कथित धमकी भरे संदेशों, फोन कॉल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि धमकियों के आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।





































