गुलदार का खूनी हमला, 13 वर्षीय हिमांशु को बनाया निवाला, घर से महज 30 मीटर दूर उठा ले गया गुलदार।

लोहाघाट मे दिवाली से पहले गुलदार ने बुझा डाला घर का इकलौता चिराग। 13 वर्षीय किशोर को घर के पास से उठा ले गया गुलदार।

ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश। कई दिनों से गांव में दिख रहा है गुलदार। 

डीएम पहुंचे मौके पर वन विभाग को दिए तत्काल पिंजरा लगाने के निर्देश।

मेला देखकर लौट रहे छात्र को घर से मात्र 30 मीटर की दूरी से उठा ले गया गुलदार।

दिवाली से पहले सुई डूंगरी गांव में पसरा मातम, दो बहनों के इकलौते भाई की मौत से परिवार में कोहराम; ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश, गुलदार को आदमखोर घोषित कर मारने की उठी मांग

चंपावत। जनपद चंपावत के लोहाघाट क्षेत्र में गुलदार का आतंक एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। सुई डूंगरी गांव में गुलदार ने 13 वर्षीय मासूम हिमांशु पुजारी पर हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। दिवाली से ठीक पहले हुई इस हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। मेला देखकर घर लौट रहे हिमांशु को गुलदार घर से महज 30 मीटर पहले घात लगाकर उठा ले गया। काफी खोजबीन के बाद देर रात उसका शव घर के नीचे खेतों में बरामद हुआ। घटना के बाद जहां परिवार में चीख-पुकार मची है, वहीं पूरे गांव में दहशत का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम करीब 6:30 बजे हिमांशु पुजारी पुत्र गंगादत्त पुजारी रायकोट में आयोजित मेले को देखकर अपने घर लौट रहा था। जैसे ही वह घर से लगभग 30 मीटर पहले पहुंचा, पहले से घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक उस पर हमला कर दिया। इससे पहले कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, गुलदार बच्चे को उठाकर जंगल की ओर ले गया। काफी देर तक हिमांशु के घर नहीं पहुंचने पर परिजनों को चिंता हुई और उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर उसकी तलाश शुरू कर दी। ग्रामीणों ने आसपास के जंगलों और खेतों में खोजबीन की। आखिरकार रात करीब 9:30 बजे घर से नीचे खेतों में हिमांशु का शव बरामद हुआ। इस दृश्य को देखकर परिजनों और ग्रामीणों के होश उड़ गए।

मृतक हिमांशु कक्षा सात का छात्र था और दो बहनों का इकलौता भाई था। जिस घर में दिवाली की तैयारियां होनी थीं, वहां अब मातम पसरा हुआ है। मासूम की असमय मौत से माता-पिता और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं।

वन विभाग की लापरवाही पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति भारी आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से गांव के आसपास गुलदार की लगातार आवाजाही बनी हुई थी। गुलदार को कई बार आबादी के नजदीक देखा गया था। इसकी सूचना वन विभाग को देने के साथ ही क्षेत्र में पिंजरा लगाने और गुलदार को पकड़ने की मांग भी की गई थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभाग ने पहले ही गंभीरता दिखाई होती तो शायद आज एक मासूम की जान नहीं जाती।

ग्रामीणों ने गुलदार को आदमखोर घोषित कर उसे तत्काल मारने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि क्षेत्र में गुलदार का आतंक लगातार बढ़ रहा है और अब लोग अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने में भी डर महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो गुलदार किसी अन्य व्यक्ति को भी अपना शिकार बना सकता है।

घटनास्थल पर पहुंचे डीएम, वन विभाग को दिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश

दर्दनाक घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी चंपावत मनीष कुमार तत्काल अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। डीएम ने घटना की जानकारी लेने के बाद ग्रामीणों के साथ घटनास्थल का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से क्षेत्र में पिंजरे लगाने, नियमित गश्त बढ़ाने और गुलदार को पकड़ने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही नियमानुसार मुआवजा देने की कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश भी दिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

जिला पंचायत अध्यक्ष और सीएमओ ने भी अस्पताल पहुंचकर ली जानकारी

घटना के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश चौहान भी अस्पताल पहुंचे। सीएमओ ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्चे की मौत हो चुकी थी। वहीं पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

लोहाघाट क्षेत्र में बढ़ते गुलदार के हमलों से दहशत

सुई डूंगरी गांव में हुई इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते वन्यजीव हमलों और मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस वर्ष लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र में गुलदार के हमलों में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हो पा रहे हैं।

दिवाली से ठीक पहले एक परिवार का चिराग बुझने से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। अब ग्रामीणों की निगाहें वन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक पहाड़ के ग्रामीण गुलदार के आतंक के साये में जीने को मजबूर रहेंगे और कब उन्हें अपने घरों के आसपास सुरक्षित माहौल मिल पाएगा?

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