भाजपा में टिकट के लिए शक्ति प्रदर्शन शुरू, कालाढूंगी सीट पर दावेदारों के बीच बढ़ी हलचल
कालाढूंगी में टिकट की जंग हुई दिलचस्प, बंशीधर भगत के बीच कमलेश कैड़ा ने भी ठोकी ताल
हल्द्वानी। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी संगठन के भीतर संभावित प्रत्याशियों को लेकर रायशुमारी और दावेदारी का दौर शुरू होते ही हल्द्वानी और कालाढूंगी विधानसभा सीट की सियासत भी गरमा गई है। खासकर कालाढूंगी विधानसभा सीट पर भाजपा के टिकट को लेकर जिस तरह दावेदार सामने आ रहे हैं, उससे आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर सियासी हलचल और तेज होने के संकेत मिलने लगे हैं।
कालाढूंगी विधानसभा सीट पर सात बार के विधायक एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता बंशीधर भगत की मौजूदगी इस मुकाबले को पहले से ही दिलचस्प बनाए हुए है। लंबे राजनीतिक अनुभव, संगठन में मजबूत पकड़ और क्षेत्र में स्थापित राजनीतिक पहचान के चलते बंशीधर भगत को इस सीट का एक प्रमुख चेहरा माना जाता है। ऐसे में उनके सामने नए दावेदारों का मजबूती से सामने आना पार्टी के अंदर टिकट की प्रतिस्पर्धा को और रोचक बना रहा है।
इसी कड़ी में ओखलकांडा की पूर्व ब्लॉक प्रमुख एवं कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा की पत्नी कमलेश कैड़ा ने भी कालाढूंगी विधानसभा सीट से भाजपा टिकट के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सियासी चर्चाओं को हवा दे दी है। मंगलवार को हल्द्वानी स्थित भाजपा कार्यालय में प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य एवं कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के समक्ष उन्होंने अपनी दावेदारी रखी। उनकी इस राजनीतिक सक्रियता को कालाढूंगी विधानसभा सीट पर नए समीकरण बनने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
कमलेश कैड़ा की दावेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उनके पति राम सिंह कैड़ा प्रदेश की राजनीति में कैबिनेट मंत्री हैं और क्षेत्रीय राजनीति में उनका अपना प्रभाव है। ओखलकांडा की पूर्व ब्लॉक प्रमुख के रूप में कमलेश कैड़ा का राजनीतिक अनुभव भी उनकी दावेदारी को एक अलग आधार देता है।
वहीं, कालाढूंगी सीट पर भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों की नजरें भी टिकट पर टिकी हुई हैं। ऐसे में बंशीधर भगत जैसे अनुभवी नेता के सामने कमलेश कैड़ा की दावेदारी ने राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है। अब पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय समीकरण, जनाधार और चुनावी संभावनाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।
राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व कालाढूंगी विधानसभा सीट पर किस चेहरे को चुनावी मैदान में उतारने का फैसला करता है। फिलहाल इतना तय है कि टिकट की दावेदारी ने कालाढूंगी की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में अन्य दावेदारों की सक्रियता और पार्टी के भीतर बनते समीकरण इस मुकाबले को और दिलचस्प बना सकते हैं।
अब सवाल यही है कि कालाढूंगी में भाजपा का टिकट सात बार के विधायक बंशीधर भगत के अनुभव और राजनीतिक कद के नाम होगा या कमलेश कैड़ा की नई दावेदारी पार्टी के समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव लाएगी? इसका जवाब आने वाले समय में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ही देगा।

