हल्द्वानी। कुमाऊं के सबसे बड़े महाविद्यालय एमबीपीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने छात्रसंघ अध्यक्ष पद के लिए धीरज बिष्ट को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। प्रत्याशी की घोषणा के साथ ही कॉलेज परिसर की छात्र राजनीति में नए समीकरण बनने लगे हैं।
ABVP की ओर से धीरज बिष्ट को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद संगठन के भीतर से ही विरोध के स्वर सामने आने लगे हैं। विद्यार्थी परिषद के लिए लंबे समय से सक्रिय रहे आर्यन बेलवाल को अध्यक्ष पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा था।
हालांकि, टिकट नहीं मिलने के बाद आर्यन बेलवाल ने पत्रकार वार्ता कर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर छात्रसंघ चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।
आर्यन बेलवाल के निर्दलीय मैदान में उतरने की घोषणा के बाद उनके समर्थन में बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने का दावा किया जा रहा है। वहीं, ABVP से जुड़े कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं द्वारा भी अपने पदों से इस्तीफा देने की बात सामने आई है। इस्तीफा देने वालों ने टिकट वितरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संगठन के निर्णय को लेकर नाराजगी जताई है।
टिकट वितरण को लेकर लगाए आरोप
आर्यन बेलवाल और उनके समर्थकों की ओर से टिकट वितरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उनका आरोप है कि संगठन के लिए लंबे समय से सक्रिय रहे आर्यन बेलवाल की जगह आईटीआई गैंग से जुड़े एक युवक को टिकट दिया गया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और यह आरोप आर्यन बेलवाल की ओर से लगाया गया है।
टिकट को लेकर सामने आई नाराजगी ने एमबीपीजी कॉलेज की छात्र राजनीति में संगठनात्मक स्तर पर भी चर्चा तेज कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विरोध का यह स्वर कितना व्यापक रूप लेता है और इसका छात्रसंघ चुनाव के समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।
निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आर्यन की एंट्री से बढ़ी हलचल
आर्यन बेलवाल के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने के बाद अध्यक्ष पद का मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है। एक ओर ABVP ने धीरज बिष्ट को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है, वहीं दूसरी ओर आर्यन बेलवाल संगठन से अलग होकर छात्रों के बीच समर्थन जुटाने की कोशिश में हैं।
अब छात्रसंघ चुनाव में टिकट वितरण से नाराज छात्रों और ABVP से जुड़े असंतुष्ट कार्यकर्ताओं की भूमिका पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
चुनावी मैदान में आने वाले दिनों में अन्य प्रत्याशियों की स्थिति स्पष्ट होने के साथ मुकाबले की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।




























