ऊंचापुल रामलीला में राजा दशरथ के संवादों ने मोहा दर्शकों का मन, कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत ने निभाई भूमिका
हल्द्वानी। ऊंचापुल रामलीला मैदान में आयोजित रामलीला में इन दिनों धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। रामलीला के दौरान राजा दशरथ के संवादों का भावपूर्ण मंचन किया गया।
इस अवसर पर कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत राजा दशरथ की भूमिका में नजर आए। अपने अभिनय, प्रभावशाली संवादों और मंच पर सहज प्रस्तुति के जरिए उन्होंने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा और रामलीला का यह प्रसंग आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा।
विधायक बंशीधर भगत का रामलीला से जुड़ाव कोई नया नहीं है। वह पिछले 51 वर्षों से भी अधिक समय से रामलीला के मंच से जुड़े हुए हैं और इस लंबी अवधि में विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाते आ रहे हैं। राजनीति और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने के बावजूद रामलीला के प्रति उनका लगाव धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति उनकी निरंतर सहभागिता को दर्शाता है। राजा दशरथ के रूप में उनकी प्रस्तुति ने एक बार फिर यह दिखाया कि रामलीला केवल अभिनय का मंच नहीं, बल्कि आस्था, संस्कार और परंपराओं से जुड़ने का माध्यम भी है।
स्थानीय कलाकारों को ग्रामीण ही देते हैं प्रशिक्षण
ऊंचापुल रामलीला की एक खास विशेषता यह है कि यहां कलाकारों को तैयार करने में स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। गांव और क्षेत्र के लोग ही कलाकारों को रामलीला के विभिन्न पात्रों, संवादों और अभिनय का प्रशिक्षण देते हैं। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को मंच पर अपनी कला दिखाने का अवसर मिलता है और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
रामलीला के आयोजन में स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी इसे सामुदायिक उत्सव का रूप देती है। कलाकारों की तैयारी से लेकर मंचन तक लोगों का सहयोग आयोजन को जीवंत बनाए रखता है। खास बात यह है कि स्थानीय स्तर पर कलाकारों को प्रशिक्षण मिलने से नई पीढ़ी भी रामलीला की परंपरा से जुड़ रही है।
रामलीला के प्रति बढ़ रहा लोगों का आकर्षण
रामलीला संचालन समिति के अनुसार, ऊंचापुल रामलीला के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में दर्शक रामलीला देखने पहुंच रहे हैं, जिससे आयोजन में उत्साह का माहौल बना हुआ है। समिति का कहना है कि रामलीला केवल धार्मिक आस्था और मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, मर्यादा, आदर्शों और पारंपरिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
राम, लक्ष्मण, सीता और राजा दशरथ जैसे पात्रों के माध्यम से रामलीला में पारिवारिक संबंधों, कर्तव्य, त्याग और मर्यादा का संदेश दिया जाता है। ऐसे आयोजनों से समाज में सांस्कृतिक चेतना मजबूत होती है और लोगों को अपनी परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा मिलती है।
ऊंचापुल रामलीला में विधायक बंशीधर भगत की प्रस्तुति ने आयोजन को खास बना दिया। पांच दशक से अधिक समय से रामलीला से उनका जुड़ाव और स्थानीय कलाकारों की सहभागिता इस बात का उदाहरण है कि क्षेत्र में धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराएं आज भी पूरी जीवंतता के साथ आगे बढ़ रही हैं।

