ब्रेकिंग न्यूज़

अनिवार्य इंटर्नशिप में ₹15 हजार मासिक स्टाइपेंड की मांग, पैरामेडिकल छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन जारी

दो साल से शासन-प्रशासन से मांग उठा रहे छात्र, एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री और सांसद को सौंपा ज्ञापन; सुशीला तिवारी अस्पताल व मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रदर्शन

हल्द्वानी। अनिवार्य छह माह की इंटर्नशिप के दौरान न्यूनतम ₹15,000 प्रतिमाह स्टाइपेंड दिए जाने की मांग को लेकर राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी समेत उत्तराखंड के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं का शांतिपूर्ण आंदोलन लगातार जारी है। छात्रों का कहना है कि वे पिछले करीब दो वर्षों से लगातार पत्राचार और विभिन्न माध्यमों से शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी मांग रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

छात्रों ने सबसे पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के प्राचार्य को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांग से अवगत कराया। इसके बाद 14 सितंबर को हल्द्वानी एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा गया। छात्रों ने सांसद अजय भट्ट को भी ज्ञापन सौंपा। छात्रों के अनुसार सांसद की ओर से संबंधित स्तर पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

मांग पर अभी तक समाधान नहीं होने के बाद 15 सितंबर से सुशीला तिवारी अस्पताल में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन शुरू किया गया। इसके अगले दिन राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में भी छात्रों ने प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी है।

डे और नाइट शिफ्ट में करीब आठ घंटे की ड्यूटी

पैरामेडिकल छात्रों के अनुसार छह माह की अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान उन्हें डे और नाइट शिफ्ट में करीब आठ घंटे तक विभिन्न विभागों में व्यावहारिक प्रशिक्षण लेना पड़ता है। बीएससी एमएलटी के विद्यार्थी पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी लैब में सेवाएं देते हैं, जबकि रेडियोलॉजी के छात्र एक्स-रे, सीटी और एमआरआई जैसी सेवाओं से जुड़ी व्यावहारिक ट्रेनिंग लेते हैं।

इसी तरह ओटी टेक्नीशियन के छात्र ऑपरेशन थिएटर, वार्ड और आईसीयू से संबंधित कार्यों का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। एनेस्थीसिया समेत अन्य चिकित्सा सेवाओं में भी पैरामेडिकल छात्रों की भूमिका रहती है। छात्रों का कहना है कि इंटर्नशिप उनके पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा है और इस दौरान वे अस्पताल की कार्यप्रणाली में नियमित रूप से योगदान देते हैं।

फीस और रहने का खर्च भी छात्रों पर

आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि एक ओर उनसे करीब ₹50,000 वार्षिक फीस ली जाती है, वहीं दूसरी ओर छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण कई विद्यार्थियों को पीजी अथवा किराए के कमरों में रहना पड़ता है। इसके अलावा भोजन, किराया और आने-जाने का खर्च भी उन्हें स्वयं वहन करना पड़ता है।

छात्रों के अनुसार छह माह की अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान किसी प्रकार का स्टाइपेंड नहीं मिलने से उन पर आर्थिक दबाव और बढ़ जाता है।

एक विद्यार्थी ने कहा कि उनकी मांग कोई बड़ी मांग नहीं है। छात्रों की अपेक्षा है कि अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान उन्हें कम से कम ₹15,000 प्रतिमाह का उचित स्टाइपेंड उपलब्ध कराया जाए, जिससे प्रशिक्षण अवधि में होने वाले खर्च का कुछ हिस्सा वहन किया जा सके।

AIIMS समेत अन्य संस्थानों का दिया उदाहरण

छात्रों का कहना है कि देश के कई चिकित्सा संस्थानों, जिनमें AIIMS जैसे संस्थान भी शामिल हैं, में इंटर्नशिप अथवा प्रशिक्षण से जुड़े विद्यार्थियों के लिए स्टाइपेंड की व्यवस्था है। ऐसे में उत्तराखंड के पैरामेडिकल छात्रों की मांग पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

इस आंदोलन में राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी, राजकीय मेडिकल कॉलेज पौड़ी गढ़वाल और दून मेडिकल कॉलेज देहरादून के छात्र-छात्राएं शामिल हैं। छात्रों के अनुसार 2022, 2023, 2024 और 2025 बैच के विद्यार्थी भी आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

एक सूत्रीय प्रमुख मांग

आंदोलनरत पैरामेडिकल छात्र-छात्राओं की मुख्य मांग है कि अनिवार्य छह माह की इंटर्नशिप के दौरान प्रत्येक पैरामेडिकल छात्र-छात्रा को न्यूनतम ₹15,000 प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाए।

छात्रों ने सरकार से मांग पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

Advertisement
यह भी पढ़ें :  यूकेएसएसएससी ने वन विकास निगम में स्केलर के पदों पर निकाली भर्ती, इस तारीख से शुरू होंगे ऑनलाइन आवेदन
❌ Content Protection Enabled: Right-click & text copying is disabled on this website.