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भीमताल में बाघ आतंक पर धरना, हरीश पनेरु ने कहा— विद्यालय बंद करना समाधान नहीं

धरने के बाद जागा प्रशासन, बाघ आतंक को लेकर वन विभाग को मिले त्वरित निर्देश

बाघ आतंक के खिलाफ दो घंटे का घेराव, हरीश  पनेरु की पहल पर बनी सहमति

भीमताल। जाङापानी धानाचूली क्षेत्र के पास बाघ के आतंक को लेकर एक प्रदर्शन एवं धरना आयोजित किया गया। धरने का नेतृत्व पूर्व दर्जा राज्य मंत्री हरीश पनेरु ने किया।

इस दौरान उन्होंने धरना स्थल से ही वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक, कुमाऊं मंडल के वन संरक्षक एवं जिलाधिकारी नैनीताल से दूरभाष पर वार्ता कर स्थिति से अवगत कराया।

हरीश पनेरु ने कहा कि पूरे विद्यालयों को बंद करना समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के विधायक और ब्लॉक प्रमुख विद्यालय बंद करवाने को अपनी उपलब्धि मान रहे हैं, जो गंभीर चिंतन और मंथन का विषय है।

बाघ के आतंक से निजात दिलाने के लिए पनेरु ने उच्च अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनमें प्रमुख रूप से—

5 से 10 किलोमीटर दूर से आने वाले बच्चों के लिए वन विभाग द्वारा सुरक्षा में स्कूल आने-जाने की व्यवस्था

अभिभावकों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान

ग्रामीण क्षेत्रों में जानवरों के लिए चारा व्यवस्था

प्रत्येक घर में सोलर लाइट लगाने की व्यवस्था ताकि अंधेरे में बाघ के खतरे को भांपा जा सके

उन्होंने जिलाधिकारी नैनीताल और मुख्य वन संरक्षक उत्तराखंड से मांग की कि वन विभाग के विशेषज्ञों को तत्काल जंगलों में तैनात किया जाए, ग्रामीणों में फैली दहशत को दूर किया जाए तथा आवश्यक क्षेत्रों में पिंजरे लगाए जाएं।

उच्च अधिकारियों ने मौके पर ही संबंधित विभागीय अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए। धरना स्थल पर उप जिलाधिकारी धारी अंशुल भट्ट, वन क्षेत्र अधिकारी विजय भट्ट, सहित वन विभाग के कई अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

लगभग दो घंटे के घेराव और सहमति बनने के बाद उप जिलाधिकारी धारी एवं वन क्षेत्र अधिकारी ग्रामीणों की समस्याएं जानने के लिए कुटिया खान क्षेत्र की ओर रवाना हुए।

इस अवसर पर हरीश पनेरु एवं पर्यावरण प्रेमी चन्दन नयाल ने संयुक्त रूप से मांग की कि विद्यालय बंद करने के बजाय—

स्कूलों का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक किया जाए

कुछ समय के लिए प्रार्थना सभा पर रोक लगाई जाए

बच्चों के लिए सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल बनाया जाए।

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