देहरादून। नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर चल रहा उपनल कर्मियों का आंदोलन उग्र हो गया है।

सरकार के साथ आठवीं वार्ता भी विफल होने के बाद कर्मचारियों ने भारी आक्रोश व्यक्त करते हुए सैनिक कल्याण सचिव दीपेंद्र चौधरी का पुतला दहन किया और शासन की ओर से जारी नो वर्क, नो पे आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया।

उपनल कर्मियाें ने स्पष्ट किया कि बिना की भय और दबाव के हड़ताल मांग पूरी होने तक जारी रहेगी।

शासन की ओर से हड़ताल पर रोक और वेतन रोकने के आदेश जारी करने के बाद उपनल कर्मियों में उबाल है। संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक विनोद गोदियाल ने कहा कि सरकार एक ओर नियमितीकरण के मुद्दे पर उप समिति बनाने का दिखावा करती है, जबकि दूसरी ओर कर्मचारियों को डराने के लिए धमकाने वाले शासनदेश जारी कर रही है।

उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों पर बातचीत से बचना और दमनकारी आदेश जारी करना बताता है कि सरकार समस्या समाधान में गंभीर नहीं है। दसवें दिन के धरने में प्रदेश संयोजक हरीश कोठारी, कार्यकारी अध्यक्ष महेश भट्ट, प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रदीप चौहान, संगठन मंत्री भूपेश नेगी, सागर ध्यानी, विनीत खंडूरी, प्रकाश, मनोज सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे। उपनल कर्मियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।

सिर मुंडवाकर विरोध, आंदोलन और तेज करने की चेतावनी

प्रदेश महामंत्री विनय प्रसाद ने बताया कि दस दिन से जारी धरने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कदम न उठाए जाने से कर्मचारियों का रोष चरम पर है। उन्होंने बताया कि विरोध के प्रतीक रूप में उत्तरकाशी के जिला महामंत्री आजाद रावत और वाहन चालक संघ के प्रदेश महामंत्री अजय डबराल ने सिर मुंडवाकर सरकार के रवैये के प्रति नाराजगी व्यक्त की।

बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों ने हड़ताल को दिया समर्थन

देहरादून: उत्तराखंड विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने औपचारिक रूप से उपनल कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को समर्थन देने की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। मोर्चा ने सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप कर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

संयुक्त मोर्चा ने अपने पत्र में कहा है कि उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों और निगमों में कार्यरत हजारों कर्मचारी लंबे समय से नियमितिकरण और समान वेतन की मांग कर रहे हैं।

इस संबंध में दाखिल कई विशेष याचिकाएं और पुनर्विचार याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं, जबकि उच्च न्यायालय नैनीताल ने अवमानना याचिकाओं में कई बार निर्णय दिए हैं।

मोर्चा ने यह भी उल्लेख किया कि संबंधित मामले पर उच्चतम न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय गुरुवार को अपेक्षित है।

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