कालाढूंगी के चकलुवा स्थित एथेनॉल फैक्ट्री के खिलाफ लामबंद हुए सभासद, SDM को सौंपा ज्ञापन
रिपोर्टर: नीरज तिवारी
कालाढूंगी। नैनीताल जिले के कालाढूंगी क्षेत्र अंतर्गत चकलुवा में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर स्थानीय विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। फैक्ट्री के संचालन को लेकर कालाढूंगी नगर पालिका के सभासदों ने एकजुट होकर उपजिलाधिकारी सुधीर कुमार को संयुक्त ज्ञापन सौंपते हुए प्रस्तावित प्लांट के संचालन पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
सभासदों का आरोप है कि फैक्ट्री संचालक के पास प्लांट के संचालन के लिए आवश्यक सभी संबंधित विभागों की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में बिना सभी वैधानिक और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी किए फैक्ट्री शुरू किए जाने की संभावना को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है।
ज्ञापन के माध्यम से सभासदों ने कहा कि चकलुवा और उसके आसपास का क्षेत्र कृषि प्रधान है और यहां बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका खेती-किसानी पर निर्भर है। यदि एथेनॉल फैक्ट्री का संचालन शुरू होता है तो इसका प्रतिकूल प्रभाव क्षेत्र के पर्यावरण, जल संसाधनों और कृषि भूमि पर पड़ सकता है।
जनप्रतिनिधियों ने विशेष रूप से क्षेत्र के भूजल स्तर में गिरावट की आशंका जताई है। उनका कहना है कि औद्योगिक इकाई के संचालन में बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होने की स्थिति में आसपास के गांवों में भूजल संकट गहरा सकता है। इसके अलावा फैक्ट्री से निकलने वाले संभावित प्रदूषण और अपशिष्ट के कारण खेतों और फसलों को नुकसान पहुंचने की भी आशंका व्यक्त की गई है।
सभासदों का कहना है कि यदि क्षेत्र में किसी प्रकार का जहरीला प्रदूषण फैलता है तो इसका असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और प्राकृतिक पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण चकलुवा सहित आसपास के क्षेत्रों की जनता और नगर पालिका बोर्ड इस मुद्दे पर लामबंद हो गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी सुधीर कुमार ने जनप्रतिनिधियों की चिंताओं को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि फैक्ट्री से संबंधित सभी तकनीकी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक दस्तावेजों की नियमानुसार गहन जांच कराई जाएगी। जांच के बाद ही नियमों और मानकों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
चकलुवा में प्रस्तावित एथेनॉल फैक्ट्री अब क्षेत्र का एक बड़ा स्थानीय मुद्दा बनती जा रही है। एक ओर जनप्रतिनिधि पर्यावरण, भूजल और कृषि को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रशासन द्वारा दस्तावेजों की जांच के आश्वासन के बाद अब क्षेत्रवासियों की नजर आगामी प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।




