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वन विभाग की कार्यप्रणाली पर ग्रामीणों में आक्रोश, बोले—बड़ी घटना का इंतजार कर रहा विभाग; कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी

रिपोर्टर:  नीरज तिवारी 

कालाढूंगी। चकलुवा क्षेत्र के रतनपुर गांव में इन दिनों बाघ की लगातार सक्रियता से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से बाघ का आतंक बना हुआ है और बाघ आए दिन पालतू जानवरों को अपना शिकार बना रहा है। कभी पालतू कुत्तों तो कभी गाय-भैंसों को बाघ द्वारा उठाकर ले जाने की घटनाओं से ग्रामीणों में भय बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, बाघ की लगातार मौजूदगी की सूचना कई बार वन विभाग को दी जा चुकी है, लेकिन अभी तक बाघ की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने अथवा उसे पकड़ने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

घर के आंगन से कुत्ते को उठा ले गया बाघ

बाघ की सक्रियता का ताजा मामला मंगलवार रात सामने आया। रतनपुर निवासी विशाल संधू के घर के आंगन से बाघ उनके पालतू कुत्ते को उठाकर ले गया। बताया गया कि रात के समय बाघ अचानक घर के आंगन में पहुंचा और पालतू कुत्ते को अपना शिकार बनाकर वहां से जंगल की ओर ले गया।

घटना के बाद विशाल संधू तत्काल मामले की सूचना देने रतनपुर स्थित वन विभाग की चौकी पहुंचे। उनका आरोप है कि चौकी पहुंचने के बाद करीब 30 मिनट तक बाहर से आवाज देने के बावजूद कोई कर्मचारी बाहर नहीं आया। लगभग आधे घंटे बाद एक फॉरेस्ट गार्ड बाहर आए, जिन्हें पूरी घटना की जानकारी दी गई।

विशाल संधू के मुताबिक, फॉरेस्ट गार्ड ने बताया कि चौकी में वह अकेले हैं और फिलहाल इस मामले में कोई विशेष सहायता उपलब्ध नहीं करा सकते। इस रवैये से ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई।

ग्रामीणों में बढ़ता जा रहा है भय

ग्रामीणों का कहना है कि बाघ की लगातार आवाजाही के कारण लोग शाम ढलने के बाद घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं। सबसे अधिक चिंता बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाघ इसी तरह आबादी के आसपास घूमता रहा तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में बाघ की लगातार निगरानी की जाए, कैमरा ट्रैप और गश्त बढ़ाई जाए तथा आवश्यकता के अनुसार बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाए।

“क्या बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा विभाग?”

ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? उनका कहना है कि यदि बाघ किसी ग्रामीण पर हमला करता है या कोई जनहानि होती है, उसके बाद कार्रवाई करने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि समय रहते बाघ को आबादी क्षेत्र से दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही वन विभाग द्वारा बाघ को पकड़ने अथवा उसकी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्रवासी आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि ऐसी स्थिति में होने वाली किसी भी अप्रिय घटना के लिए वन विभाग की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

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