भीमताल में 48 घंटे की मूसलाधार बारिश ने खोली ड्रेनेज व्यवस्था की पोल, 6 किमी पर्यटन मार्ग तबाह; नाले में 4 वर्षीय बच्ची की मौत

जलभराव, मलबे और भूस्खलन से जनजीवन अस्त-व्यस्त, नौकुचियाताल मार्ग पर पर्यटकों की गाड़ियां फंसीं; सामाजिक कार्यकर्ता पूरन बृजवासी ने स्थायी समाधान की उठाई मांग

भीमताल। भीमताल क्षेत्र में पिछले 48 घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। भारी बारिश के कारण नगर क्षेत्र में जगह-जगह जलभराव, मलबा, सड़क टूटने और नालों के उफान पर आने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कई स्थानों पर सड़कों पर मलबा जमा होने से यातायात बाधित है, जबकि मुख्य पर्यटन मार्गों पर भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

भीमताल-नौकुचियाताल मुख्य पर्यटन मार्ग 6 किलोमीटर तक प्रभावित

भीमताल से नौकुचियाताल को जोड़ने वाला करीब 6 किलोमीटर लंबा मुख्य पर्यटन मार्ग बारिश के चलते कई स्थानों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। सड़क पर मलबा और कीचड़ जमा होने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और कई जगह जाम की स्थिति बनी हुई है। पर्यटकों की गाड़ियां भी मार्ग में फंस रही हैं।

जंगलियागांव की पहाड़ी सड़क से होते हुए वार्ड संख्या 3 नौल-बिजरौली क्षेत्र में भी भारी तबाही की स्थिति सामने आई है। नगर पालिका का करीब डेढ़ किलोमीटर सार्वजनिक रास्ता रोड़ा, रेत, मिट्टी और मलबे से पट गया है तथा कई स्थानों पर टूट भी गया है। बताया जा रहा है कि यही मलबा आईटीआई मार्ग होते हुए नौकुचियाताल की मुख्य पर्यटन सड़क तक पहुंच गया, जिससे सड़क पर कीचड़ और मलबे का जमाव हो गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नालों और जल निकासी मार्गों पर प्रभावी एवं स्थायी कार्य किया गया होता तो बारिश के दौरान हालात इतने भयावह नहीं होते।

बाईपास नाले में बहकर 4 वर्षीय बच्ची की दर्दनाक मौत

भीमताल में बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा भी सामने आया। बाईपास नाले में चार वर्षीय बच्ची के बह जाने से उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे नगर में शोक की लहर है। लगातार बारिश के कारण नाले और गधेरे उफान पर हैं, जिससे स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

खुटानी नाले ने मचाई व्यापक तबाही

मेहरागांव और खुटानी क्षेत्र से आने वाले नाले ने भीमताल के कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया है। ब्लॉक रोड, विकास भवन, सिडकुल, बाईपास तथा जून स्टेट के वार्ड संख्या 6, 7, 8 और 9 तक इसका असर देखने को मिला है।

नाले के तेज बहाव के साथ रोड़ा-बजरी, रेत और मिट्टी बहकर सीधे भीमताल झील में पहुंच रही है। इससे झील में लगातार गाद जमा होने का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नालों के बहाव को नियंत्रित करने के लिए चेक डैम, सिल्ट ट्रैप और जाल आदि की व्यवस्था पहले से की गई होती तो मलबे को झील में जाने से काफी हद तक रोका जा सकता था।

2012 से स्थायी ड्रेनेज व्यवस्था की मांग, फिर भी धरातल पर नहीं हुआ स्थायी काम

सामाजिक कार्यकर्ता पूरन बृजवासी ने कहा कि वह वर्ष 2012 से लगातार पत्राचार के माध्यम से जनप्रतिनिधियों, संबंधित अधिकारियों और जिला प्रशासन के समक्ष भीमताल में आपदा संभावित क्षेत्रों के सुधार और रोकथाम की मांग उठाते आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2016-17 से विकास भवन में कई बार समीक्षा बैठकें भी कराई गईं, जिनमें जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग, नगर पालिका, राजस्व विभाग और प्राधिकरण विभाग के अधिकारियों को भीमताल के ड्रेनेज सिस्टम तथा आपदाग्रस्त नालों की स्थिति से अवगत कराया गया। इसके बावजूद अभी तक धरातल पर ऐसा कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया, जिससे हर वर्ष बारिश के दौरान होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

9 वार्डों सहित आपदा प्रभावित क्षेत्रों के स्थायी उपचार की मांग

पूरन बृजवासी ने जून स्टेट, ठकुड़ा, मेहरागांव, खुटानी, गोरखपुर, बाईपास, ब्लॉक रोड, रामनिवास, बिलासपुर, नौल, बिजरौली और शाहखोला सहित नगर के सभी आपदा संभावित क्षेत्रों में स्थायी एवं दूरदर्शी कार्य कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि हर वर्ष बारिश के दौरान इन्हीं क्षेत्रों में सड़कें टूटती हैं, नाले उफनते हैं और लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय आपदा संकट मोचन मद, विभागीय मद, जिला योजना और राज्य योजना सहित विभिन्न मदों से स्थायी उपचार एवं रोकथाम के कार्य कराए जाने चाहिए।

डीएम से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

उन्होंने जिलाधिकारी नैनीताल से मामले का तत्काल संज्ञान लेकर भीमताल नगर की जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त कराने की मांग की है। मांग की गई है कि नगर क्षेत्र के सभी कलवर्ट और नालियां तत्काल खोली जाएं तथा नालों के मुहानों पर मौजूद अतिक्रमण हटाया जाए।

इसके अलावा आपदा और जेसीबी कार्यों के दौरान क्षतिग्रस्त हुई पेयजल लाइनों को शीघ्र ठीक कराने, खुटानी और बिजरौली नालों पर चेक डैम, सिल्ट ट्रैप एवं सुरक्षा जाल लगाने तथा पूरे क्षेत्र के ड्रेनेज सिस्टम में वैज्ञानिक और स्थायी सुधार करने की मांग की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भीमताल एक महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्र है।

ऐसे में मुख्य पर्यटन मार्गों और नगर की जल निकासी व्यवस्था को हर साल आपदा के बाद अस्थायी रूप से ठीक करने के बजाय दीर्घकालिक योजना बनाकर स्थायी समाधान किया जाना बेहद जरूरी है।

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