तिब्बत से आई बाढ़ ने नेपाल में मचाई तबाही! 95 की मौत, 105 भारतीय-291 विदेशी टूरिस्ट लापता, बिहार-UP में अलर्ट
भोटेकोशी नदी में अचानक आया सैलाब, सड़क-पुल और बिजली व्यवस्था ध्वस्त—11 हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित, 431 मेगावाट बिजली उत्पादन ठप; भारत-नेपाल सीमा पर SSB अलर्ट
काठमांडू। नेपाल में बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक आए भीषण सैलाब ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। सुबह करीब नौ बजे आए इस प्रचंड बाढ़ के पानी और मलबे ने रसुवा और नुवाकोट जिलों में घरों, सड़कों, पुलों, बाजारों और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 95 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि 500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक और भारतीय भी शामिल हैं।
बाढ़ के कारण कई इलाकों का देश के दूसरे हिस्सों से संपर्क पूरी तरह कट गया है। बिजली और मोबाइल नेटवर्क बाधित होने से राहत एवं बचाव अभियान में भी मुश्किलें आ रही हैं। कई स्थानों पर हेलिपैड तक बाढ़ के पानी और मलबे में बह गए, जिसके चलते राहत के लिए पहुंचे हेलिकॉप्टरों को बिना उतरे वापस लौटना पड़ा।
भोटेकोशी नदी में अचानक आया विकराल सैलाब
टिमुरे से लेकर त्रिशूली बाजार और बेत्रावती तक भोटेकोशी नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ ने भारी विनाश किया। नदी का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान मलबे में तब्दील हो गए, जबकि नदी पर बने पुल तेज बहाव में बह गए।
अधिकारियों के अनुसार, रसुवा में पिछले 24 घंटों के दौरान महज करीब 7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इतनी कम बारिश के बावजूद नदी में अचानक आए इतने बड़े सैलाब ने आपदा के कारणों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भूकंप और हिमस्खलन से सैलाब आने की आशंका
प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि इस तबाही के पीछे सामान्य बारिश के बजाय हिमस्खलन, भूस्खलन और भूकंपीय गतिविधि की भूमिका हो सकती है। बताया जा रहा है कि ल्हेंदे नदी क्षेत्र में भारी मात्रा में बर्फ और मलबा नदी में गिरने से पानी का बहाव कुछ समय के लिए रुक गया था। इससे वहां प्राकृतिक बांध जैसा अवरोध बन गया। बाद में यह अवरोध अचानक टूट गया और भारी मात्रा में पानी भोटेकोशी नदी में पहुंच गया।
इसी दौरान सुबह करीब 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। भूकंप और बाढ़ के समय में समानता को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि भूकंपीय झटकों से हिमस्खलन या भूस्खलन हुआ होगा, जिसने नदी के बहाव को रोककर बाद में अचानक सैलाब का रूप ले लिया।
500 से ज्यादा लोग लापता, 291 विदेशी नागरिक शामिल
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार बाढ़ के बाद करीब 500 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 291 विदेशी नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें सबसे अधिक 142 भारतीय नागरिक हैं, जिनमें 105 भारतीय नागरिक और 37 एनआरआई बताए गए हैं।
इसके अलावा 17 मलेशियाई, 12 ब्रिटिश, 8 दक्षिण कोरियाई और 4 दक्षिण अफ्रीकी नागरिकों के साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के एक-एक नागरिक के लापता होने की जानकारी दी गई है। लापता लोगों की तलाश में नेपाली सुरक्षा बल और राहत दल लगातार अभियान चला रहे हैं।
रसुवा और नुवाकोट में सबसे ज्यादा तबाही
बाढ़ की सबसे ज्यादा मार रसुवा और नुवाकोट जिलों में पड़ी है। नुवाकोट के सहायक मुख्य जिला अधिकारी कृष्ण प्रसाद हुमागैन के मुताबिक कई बस्तियां पूरी तरह मलबे में बदल गई हैं। बाजार, बैंक और दर्जनों पक्के पुल भी बाढ़ के तेज बहाव में बह गए।
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इलाके के इतिहास में इस स्तर की तबाही पहले कभी नहीं देखी गई। लांगटांग खोला जलविद्युत परियोजना से जुड़े करीब 60 कर्मचारियों से संपर्क टूटने की भी जानकारी सामने आई है।
11 हाइड्रोपावर प्लांट क्षतिग्रस्त, 431 मेगावाट उत्पादन ठप
बाढ़ ने नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। करीब 11 हाइड्रोपावर परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं और लगभग 431 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित होकर सिस्टम से बाहर हो गई है। बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन ढांचे को हुए नुकसान से प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल करना चुनौती बन गया है।
40 किलोमीटर सड़कें और 19 से ज्यादा पुल क्षतिग्रस्त
आपदा में करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। रसुवा से माल्खु के बीच 20 से ज्यादा सस्पेंशन और मोटरेबल पुलों के बह जाने से कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
स्थिति को देखते हुए नेपाल सरकार ने पृथ्वी राजमार्ग, गल्छी-स्याफ्रुबेसी और मुग्लिंग-नारायणगढ़ मार्ग पर आवाजाही रोक दी है। प्रशासन ने लोगों से प्रभावित इलाकों में अनावश्यक यात्रा नहीं करने की अपील की है।
टेलीकॉम नेटवर्क भी बुरी तरह प्रभावित
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल की संचार व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है। टिमुरे, स्याफ्रुबेसी और नुवाकोट में नेपाल टेलीकॉम और एनसेल के टावर, ऑप्टिकल फाइबर तथा 25 से अधिक टेलीकॉम साइटें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसके चलते बड़े इलाके में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं।
बैंक और वित्तीय संस्थानों के कई कार्यालय भी बाढ़ की चपेट में आए हैं, जिससे स्थानीय लोगों के सामने आर्थिक और प्रशासनिक परेशानियां बढ़ गई हैं।
नेपाली सेना ने संभाला मोर्चा, 88 लोगों को बचाया
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नेपाली सेना ने बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया है। सेना के प्रवक्ता राजाराम बसनेत के अनुसार, अब तक 88 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें गंभीर रूप से घायल 13 लोगों को काठमांडू स्थित त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।
अन्य बचाए गए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि कई घायलों का प्राथमिक उपचार त्रिशूली कैंप में किया जा रहा है। राहत-बचाव के लिए कुल 12 हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं, जिनमें चार नेपाली सेना के हैं और अन्य निजी कंपनियों के हेलिकॉप्टर हैं।
सेना के 44 जवान समेत 80 सुरक्षाकर्मी लापता
आपदा की चपेट में राहत, बचाव और सीमा सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी भी आए हैं। जानकारी के अनुसार अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों में कुल 80 सुरक्षाकर्मी लापता हैं, जिनमें नेपाली सेना के 44 जवान शामिल हैं। उनकी तलाश के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
भारत ने मदद का भरोसा दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर जान-माल के नुकसान पर संवेदना व्यक्त की और कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत अपने नेपाली भाई-बहनों के साथ खड़ा है।
भारत ने मानवीय सहायता और राहत-बचाव के लिए हर संभव मदद देने की तैयारी की है। रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर और C-130J सुपर हरक्यूलिस विमान राहत सामग्री, दवाइयों और भारी बचाव उपकरणों के साथ जरूरत पड़ने पर तत्काल रवाना किए जाने के लिए तैयार रखे गए हैं।
भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन जारी
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। संकट में फंसे भारतीय नागरिक +977 9851316807 और +977 9709107500 पर संपर्क कर सकते हैं।
नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी पर्यटकों की सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और टूरिस्ट पुलिस का संपर्क नंबर 9851289445 सक्रिय किया है।
बिहार और उत्तर प्रदेश में भी अलर्ट
नेपाल में भारी बाढ़ के बाद गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए बिहार के छह जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिला प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर जिलों में भी प्रशासन को सतर्क किया गया है। गंडक और नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए संवेदनशील गांवों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
भारत-नेपाल सीमा पर SSB की 11 टीमें तैनात
नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 11 राहत एवं बचाव टीमें तैनात की गई हैं। सीमा क्षेत्र में संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए जवानों को तैयार रखा गया है।
नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बाद जहां एक ओर बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान जारी है, वहीं दूसरी ओर लापता लोगों की तलाश सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। संचार व्यवस्था बाधित होने और कई इलाकों का सड़क संपर्क टूटने के कारण राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।










