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तल्लीताल डांठ पर शुरू हुआ आंदोलन, विधायक सरिता आर्या और एसडीएम ने मांगा एक सप्ताह का समय; रोजाना 11 से 5 बजे तक सांकेतिक धरने का ऐलान

तल्लीताल डांठ पर सड़क के लिए धरना, कृष्णापुर के लोगों ने उठाए 300 करोड़ के निर्माण कार्य पर सवाल
नैनीताल। तल्लीताल से लगे कृष्णापुर, दुर्गापुर और वीरभट्टी क्षेत्र के लोगों ने मोटर मार्ग की मांग को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। गुरुवार को क्षेत्र के दर्जनों लोग तल्लीताल डांठ पर धरने और अनशन पर बैठ गए। क्षेत्रवासियों की मांग है कि कृष्णापुर क्षेत्र को नैनीताल शहर और मंडल एवं जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले पुराने मोटर मार्ग को जल्द सुचारू किया जाए।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह मार्ग पहले ‘ब्रेवरी रोड’ के नाम से जाना जाता था। बलियानाला क्षेत्र में पहाड़ी के ट्रीटमेंट का काम होने के बाद भी करीब 100 मीटर मोटर मार्ग को अब तक नहीं जोड़ा गया है, जिसके कारण कृष्णापुर समेत आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
‘जब हजारों टन की मशीनें चल सकती हैं तो छोटी गाड़ियां क्यों नहीं’
आंदोलनकारियों ने जिलाधिकारी नैनीताल और सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता को दिए पत्र में बलियानाला क्षेत्र में चल रहे कार्यों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बलियानाला के उपचार कार्य में हजारों टन की भारी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि इन मशीनों के आवागमन और भार से सड़क या उपचारित क्षेत्र को नुकसान नहीं हो रहा है तो क्षेत्रवासियों की छोटी-छोटी गाड़ियों से खतरा कैसे हो सकता है।
क्षेत्रवासियों का तर्क है कि भारी मशीनों से होने वाला कंपन भी छोटी गाड़ियों की तुलना में कहीं अधिक होता है। ऐसे में यदि मशीनों की आवाजाही जरूरी है तो करीब तीन हजार लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही के लिए मोटर मार्ग भी उतना ही जरूरी है।
300 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी सड़क जोड़ने पर सवाल
पूर्व सभासद कैलाश रौतेला द्वारा दिए गए पत्र में बलियानाला ट्रीटमेंट कार्य पर खर्च हुई करीब 300 करोड़ रुपये की धनराशि का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया गया है।

उन्होंने कहा कि यदि इतनी बड़ी धनराशि खर्च करने के बाद भी क्षेत्र को छोटी गाड़ियों की आवाजाही के लिए सुरक्षित नहीं माना जा रहा है तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी आधार पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्होंने मांग की कि यह स्पष्ट किया जाए कि भारी मशीनों की आवाजाही और क्षेत्र में किए गए कार्यों के संबंध में किस भू-वैज्ञानिक रिपोर्ट या तकनीकी अध्ययन के आधार पर अनुमति दी गई है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सड़क कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण उन्हें नैनीताल पहुंचने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। आपात स्थिति, बीमार लोगों, बुजुर्गों और दैनिक जरूरतों के लिए भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है।
विधायक और एसडीएम ने मांगा एक सप्ताह का समय
आंदोलन के दौरान नैनीताल विधायक सरिता आर्या और एसडीएम नवाजिश खलीक भी धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने क्षेत्रवासियों से बातचीत कर समस्या के समाधान के लिए एक सप्ताह का समय मांगा।
इसके बाद आंदोलनकारियों ने फिलहाल आंदोलन को सांकेतिक रूप देने पर सहमति जताई। क्षेत्रवासियों ने कहा कि शुक्रवार से वे सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक सांकेतिक धरने पर बैठेंगे। इस दौरान किसी प्रकार की नारेबाजी नहीं की जाएगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाने पर निर्णय लिया जाएगा।

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