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बागेश्वर। कपकोट तहसील क्षेत्र में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के जरिए एक व्यक्ति को डराया-धमकाया और डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर उसके बैंक खातों से 2 लाख 60 हजार 500 रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए। ठगों ने पुलिस की वर्दी और अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर पीड़ित को इस कदर भयभीत किया कि वह उनकी बातों में आ गया।

जानकारी के अनुसार कपकोट तहसील क्षेत्र निवासी महिपाल सिंह को साइबर ठगों ने वीडियो कॉल की। कॉल के दौरान ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और पुलिस की वर्दी में नजर आए। उन्होंने महिपाल को कथित तौर पर आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने की धमकी दी। इसके बाद उन्हें विभिन्न मामलों में फंसाने और डिजिटल अरेस्ट किए जाने का डर दिखाया गया।

डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर कराए रुपये ट्रांसफर

साइबर ठगों ने महिपाल पर लगातार दबाव बनाया और कानूनी कार्रवाई से बचने के नाम पर बैंक खातों में मौजूद रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने को कहा। ठगों के दबाव में आकर महिपाल ने कुल 2,60,500 रुपये बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। रकम ट्रांसफर होने के बाद जब उन्हें पूरे मामले पर संदेह हुआ और ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।

कपकोट थाने में प्राथमिकी दर्ज, जांच शुरू

महिपाल की शिकायत के आधार पर कपकोट थाने में साइबर ठगी का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

थाना अध्यक्ष प्रताप सिंह नगरकोटी ने बताया कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
पुलिस ने आम जनता को साइबर ठगों से सावधान रहने की अपील की है। पुलिस के मुताबिक अनजान नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल या वाट्सएप कॉल पर किसी भी व्यक्ति की पहचान पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर धमकाता है और पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाता है तो बिना घबराए इसकी सूचना संबंधित पुलिस थाने या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। साइबर अपराधी अक्सर लोगों को गिरफ्तारी, मुकदमे और बदनामी का डर दिखाकर मानसिक दबाव में लेते हैं और फिर बैंक खातों से रकम ट्रांसफर करा लेते हैं। ऐसे किसी भी कॉल में घबराकर पैसे ट्रांसफर करने के बजाय तत्काल कॉल काटकर संबंधित एजेंसी से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करना चाहिए।

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