मंगोली में विधि-विधान से हुआ कदली पूजन, सुखताल से तल्लीताल और मल्लीताल होते हुए मां नयना देवी मंदिर पहुंची कदली यात्रा; आज इन्हीं कदली वृक्षों से तैयार होंगी मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियां
नैनीताल। श्री नन्दा देवी महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को मां नंदा-सुनंदा की मूर्ति निर्माण की महत्वपूर्ण परंपरा कदली वृक्ष पूजन एवं नगर भ्रमण के साथ निभाई गई। मंगोली गांव में विधि-विधान से कदली वृक्षों का पूजन किया गया। इसके बाद जड़ सहित दो कदली पौधों को परंपरानुसार लिया गया और जिस भूमि से कदली वृक्ष लिए गए, वहां यशपाल रावत की ओर से उपलब्ध कराए गए 21 पौधों का रोपण किया गया।
मंगोली में हुए पूजन कार्यक्रम में मेहरा परिवार के गणेश, सुरेश, किशन, भीम सिंह, भूपेंद्र, चंदन, भगवत और भुवन सहित अन्य लोग सपत्नीक शामिल हुए। पूजन की विधि-विधान से पूर्णता पंडित भगवती प्रसाद जोशी ने कराई।
सुखताल में हुआ कदली वृक्षों का पूजन
मंगोली से कदली वृक्षों को सुखताल लाया गया, जहां श्रद्धालुओं एवं आयोजन से जुड़े लोगों ने उनका पूजन किया। इस दौरान सांसद प्रतिनिधि गोपाल रावत, दर्जा राज्य मंत्री शांति मेहरा, मोहित लाल साह, सावित्री सनवाल, विक्रम साह और सभासद लता दफौटी समेत अन्य लोगों ने कदली वृक्षों की पूजा-अर्चना की।
इसके बाद कदली वृक्षों को मां वैष्णवी देवी मंदिर तल्लीताल लाया गया। यहां पहुंचने पर कदली वृक्षों का भव्य स्वागत किया गया और विधि-विधान से पूजन हुआ। श्रद्धालुओं ने अक्षत अर्पित कर मां नंदा-सुनंदा से सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।
छोलिया और बैंड की धुन पर निकली कदली यात्रा
कदली वृक्षों के नगर आगमन के साथ ही पूरा नैनीताल ‘जय नंदा-सुनंदा’ के जयकारों से गूंज उठा। छोलिया दल और बैंड की धुनों के बीच निकली कदली यात्रा ने पूरे शहर को भक्तिमय बना दिया। आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भागीदारी की। महिलाओं ने नंदा स्तुति और भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।
कदली यात्रा तल्लीताल धर्मशाला से प्रारंभ हुई और माल रोड होते हुए चीना बाबा मंदिर, श्री राम सेवक सभा भवन पहुंची। इसके बाद कदली वृक्ष मल्लीताल बाजार से होते हुए मां नयना देवी मंदिर परिसर पहुंचे। यहां मां नयना देवी मंदिर की तीन परिक्रमा करने के बाद परंपरानुसार कदली वृक्षों का पूजन किया गया।
कदली को माना जाता है मां नंदा-सुनंदा की मूर्ति का आधार
धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा में कदली वृक्ष का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार कदली में विष्णु, लक्ष्मी, भगवान शिव के साथ देवगुरु बृहस्पति का वास माना जाता है। इसी कदली वृक्ष को मां नंदा-सुनंदा की मूर्ति निर्माण का आधार बनाया जाता है।
नैनीताल में कदली वृक्षों के नगर भ्रमण के दौरान सफेद ध्वज आगे और लाल ध्वज पीछे रहा। कदली वृक्षों के साथ निकली यात्रा में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी भी शामिल हुए। इनमें मोहन लाल साह बालिका विद्या मंदिर, नरेंद्र अजय साह जगाती सरस्वती, सीआरएसटी, जीआईसी, जीजीआईसी, सेंट जॉन्स स्कूल, नैनी पब्लिक स्कूल, रामा मोंटेसरी स्कूल, एसडेल मल्लीताल, भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय, राष्ट्रीय शहीद सैनिक स्मारक विद्यापीठ, राजकीय प्राथमिक विद्यालय और उमा लवली नैनी पब्लिक स्कूल सहित अन्य विद्यालयों के विद्यार्थी शामिल रहे।
आज कदली से आकार लेंगी मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियां
कदली वृक्षों के मां नयना देवी मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं को हलवे और आलू का प्रसाद वितरित किया गया। महोत्सव की परंपरा के अनुसार अब शुक्रवार को लोक पारंपरिक कलाकार इन्हीं कदली वृक्षों के आधार से मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों का निर्माण करेंगे। इसके साथ ही महोत्सव की धार्मिक परंपराएं अगले महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश करेंगी।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी लगाया कंधा
कदली नगर भ्रमण में नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल, दर्जा राज्य मंत्री दिनेश आर्य, एसपी डॉ. जगदीश चंद्र और सीओ अंजना नेगी समेत अन्य जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने भी कदली वृक्षों को कंधा लगाया। इससे आयोजन में प्रशासनिक एवं सामाजिक सहभागिता का संदेश भी दिखाई दिया।
श्री राम सेवक सभा की ओर से अध्यक्ष मनोज साह, जगदीश बावरी, घनश्याम लाल साह, अशोक साह, राजेंद्र बिष्ट, बिमल चौधरी, बिमल साह, भुवन बिष्ट, राजेंद्र लाल साह, देवेंद्र लाल साह, घनश्याम जोशी, हीरा रावत, आनंद बिष्ट, एडवोकेट मनोज साह, प्रदीप जेठी, पुष्पा, सभासद जीनू पांडे, अंकित चंद्रा, भागवत रावत, ललित साह, तेज सिंह, भीम सिंह कार्की, दिनेश भट्ट, मंजू रौतेला, युवराज, भगवान, आशु बोरा, गिरीश भट्ट, विक्रम साह, डॉ. मोहित, एडवोकेट अजय सिंह बिष्ट, कैलाश जोशी, प्रो. ललित तिवारी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
1903 से चली आ रही है महोत्सव की परंपरा
श्री नन्दा देवी महोत्सव नैनीताल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा आयोजन है। इसकी शुरुआत वर्ष 1903 में हुई थी, जबकि श्री राम सेवक सभा वर्ष 1926 से लगातार इस महोत्सव का आयोजन करती आ रही है। कदली पूजन और नगर भ्रमण इसी महोत्सव की प्रमुख पारंपरिक धार्मिक रस्मों में शामिल है।
कदली वृक्षों के नगर भ्रमण के दौरान उमड़ी भीड़, छोलिया और बैंड की धुनों तथा मां नंदा-सुनंदा के जयकारों से सरोवर नगरी का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरती कदली यात्रा में श्रद्धालुओं ने दर्शन कर मां का आशीर्वाद लिया।










