नैनीताल। जिले के ज्यौलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति और पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही के मामले में राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश और जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर जल संस्थान और पेयजल निगम से जुड़े छह इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जन स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में सरकार की कार्रवाई के बाद संबंधित विभागों में भी हड़कंप मचा हुआ है।
सरकार के अनुसार ज्यौलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति की शिकायतों और उससे उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को गंभीरता से लिया गया। मामले में जिला प्रशासन की ओर से जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। रिपोर्ट के आधार पर अधिकारियों की जिम्मेदारी और कार्यों में बरती गई कथित लापरवाही को देखते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई।
इन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
निलंबित किए गए अधिकारियों में जल संस्थान हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता, नैनीताल जल संस्थान के सहायक अभियंता और अपर सहायक अभियंता तथा पेयजल निगम भीमताल के अधिशासी अभियंता, प्रभारी सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं।
वहीं, नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को भविष्य में कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इस तरह के मामलों में विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई से कोई अधिकारी अछूता नहीं रहेगा।
जन स्वास्थ्य से जुड़े मामले में CM ने दिए थे जांच के निर्देश
ज्यौलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल और स्वास्थ्य संबंधी स्थिति सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को गंभीरता से लिया था। मुख्यमंत्री ने शीर्ष अधिकारियों को पूरे प्रकरण की जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
जिला प्रशासन की रिपोर्ट के बाद शासन स्तर पर कार्रवाई की गई और छह इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया। सरकार का कहना है कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में किसी भी स्तर पर लापरवाही सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है, इसलिए ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
CM धामी बोले- जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार के लिए जनहित सर्वोपरि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता के हितों और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र में प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी तय है और अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
एक दिन पहले फर्जी प्रमाणपत्र मामले में भी हुई थी कार्रवाई
गौरतलब है कि ज्यौलीकोट पेयजल प्रकरण से एक दिन पहले मुख्यमंत्री के निर्देश पर NEET UG-2026 की राज्य केंद्रीयकृत काउंसिलिंग में कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश के मामले में भी कार्रवाई की गई थी।
इस मामले में अब तक आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं और उनकी प्रवेश प्रक्रिया भी रद्द की गई है। लगातार सामने आ रहे मामलों में शासन स्तर से कार्रवाई के बाद यह संदेश दिया गया है कि प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को लेकर सरकार सख्त रुख अपना रही है।





































