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देहरादून। साल 2024 में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक मां की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी, लेकिन इसी हादसे ने एक अदम्य साहस की मिसाल भी पेश की।

18 वर्षीय क्षितिज चौधरी की मौत के बाद उनकी मां ललिता चौधरी ने हार मानने के बजाय खुद ही न्याय की लड़ाई लड़ने का फैसला किया।

घटना 16 फरवरी 2024 की है, जब प्रेमनगर क्षेत्र में सड़क पार करते समय एक तेज रफ्तार डंपर ने क्षितिज को टक्कर मार दी। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया। गंभीर रूप से घायल क्षितिज को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन अगले दिन उसने दम तोड़ दिया। क्षितिज भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा था और परिवार को उसके उज्ज्वल भविष्य से बड़ी उम्मीदें थीं।

परिजनों का आरोप है कि हादसे के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में देरी की और जांच भी ठंडे बस्ते में डाल दी। अंततः आरोपी का पता न चलने की बात कहकर मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। यहीं से एक मां की असली लड़ाई शुरू हुई।

ललिता चौधरी ने खुद ही घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। उन्होंने अलग-अलग इलाकों में जाकर घंटों वीडियो देखे, लोगों से बातचीत की और हर सुराग को जोड़ने की कोशिश की। महीनों की मेहनत के बाद उन्होंने करीब 10 संदिग्ध वाहनों की पहचान की और उनकी जानकारी जुटाई।

करीब डेढ़ साल तक चले इस संघर्ष के बाद आखिरकार ललिता चौधरी उस डंपर और उसके चालक तक पहुंचने में सफल रहीं। उन्होंने पुख्ता सबूतों के साथ आरोपी की पहचान कर पुलिस को सौंपा और मामले की दोबारा जांच की मांग की।

मां द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अब पुलिस ने मामले की पुनः जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला न केवल एक सड़क हादसे की कहानी है, बल्कि एक मां के उस अटूट संकल्प की मिसाल भी है, जिसने सिस्टम की नाकामी के बावजूद हार नहीं मानी।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि दोबारा शुरू हुई जांच में आरोपी को सजा मिलती है या नहीं और क्या इस संघर्षशील मां को आखिरकार न्याय मिल पाएगा।

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