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नयी टिहरी के डोबरा-चांटी झील क्षेत्र में भीषण आंधी-तूफान के दौरान ‘फ्लोटिंग हट्स’ (तैरती हुई झोपड़ियों) की धुरी का जोड़ टूट जाने के कारण वे खतरनाक रूप से झुक गये, जिसके बाद राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के जवानों ने 30 पर्यटकों को डूबने से बचा लिया।

 डोबरा-चांटी झील क्षेत्र में भीषण आंधी-तूफान के दौरान बड़ा हादसा टल गया। ‘फ्लोटिंग हट्स’ (तैरती झोपड़ियों) की धुरी का जोड़ टूटने से वे खतरनाक रूप से झुक गईं और तेज हवाओं व ऊंची लहरों के कारण बहने लगीं। इस दौरान राज्य आपदा मोचन बल के जवानों ने साहसिक अभियान चलाकर 30 पर्यटकों को सुरक्षित बचा लिया।

कोटी कॉलोनी से पहुंची SDRF टीम ने शाम करीब पौने आठ बजे रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और सभी पर्यटकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। समय पर कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया, जिसकी तुलना जबलपुर के बरगी बांध में हाल ही में हुए क्रूज हादसे से की जा रही है, जहां तूफान के दौरान नाव पलटने से 13 लोगों की मौत हो गई थी।

घटना के बाद कार्यवाहक जिलाधिकारी वरुण अग्रवाल ने तकनीकी खराबी की उच्चस्तरीय जांच के आदेश देते हुए झील क्षेत्र में सभी संचालन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं। टिहरी के उप-मंडल मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है, जो चार दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी। समिति ‘फ्लोटिंग हट्स’ में संरचनात्मक खामियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमी की जांच करेगी।

जिलाधिकारी ने निरीक्षण के बाद बताया कि इन फ्लोटिंग हट्स के संचालन के लिए फिलहाल कोई स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) नहीं है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तेज तूफान के कारण धुरी का जोड़ टूट गया, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई।

गौरतलब है कि उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने वर्ष 2015-16 में 22 फ्लोटिंग हट्स का निर्माण कराया था। वर्ष 2020-21 से एक निजी कंपनी सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत इनका संचालन कर रही है।

टिहरी की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे ने बताया कि इस आपात स्थिति की जानकारी न तो पर्यटन विभाग और न ही संचालक द्वारा स्थानीय पुलिस को दी गई। घटना के बाद प्रशासन ने झील क्षेत्र में सभी नाव संचालकों को मौसम संबंधी चेतावनियों के मद्देनजर हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।

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