गौला और नंधौर नदी से मिला ₹227 करोड़ का बंपर राजस्व; टारगेट पूरा होने पर खनन कार्य बंद,मानसून सत्र में अब वन विभाग संभालेगा मोर्चा
हल्द्वानी। उत्तराखंड सरकार को राजस्व देने वाली कुमाऊं की प्रमुख गौला और नंधौर नदियों में इस वर्ष का खनन सत्र सफलतापूर्वक समाप्त हो गया है। शासन द्वारा निर्धारित खनन लक्ष्य मंगलवार शाम को पूरा होते ही वन विभाग ने दोनों नदियों में खनन गतिविधियों पर रोक लगा दी है। अब मानसून सत्र को देखते हुए अवैध खनन की रोकथाम के लिए वन विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में गौला और नंधौर नदियों से सरकार को कुल 227 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। गौला नदी से 51 लाख घन मीटर खनन निकासी का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके सापेक्ष सरकार को 203 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। वहीं नंधौर नदी से 7 लाख घन मीटर निकासी के लक्ष्य के बदले 24 करोड़ रुपये की आय हुई।
गौला और नंधौर नदियां प्रदेश में रोजगार का भी बड़ा स्रोत हैं। खनन कार्य से करीब 8 हजार से अधिक वाहन जुड़े हुए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड सहित अन्य राज्यों से आए हजारों मजदूरों को भी रोजगार मिलता है। लक्ष्य पूरा होने के बाद सभी तौल कांटे और निकासी गेट बंद कर दिए गए हैं, जिसके चलते बाहरी राज्यों से आए मजदूरों ने अपने घरों की ओर लौटना शुरू कर दिया है।
तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ हिमांशु बागरी ने बताया कि निर्धारित खनन लक्ष्य पूरा होने के साथ ही खनन कार्य बंद कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान किसी भी प्रकार के अवैध खनन को रोकने के लिए वन विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है।


