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जम्मू। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के अधीन आने वाले मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 50 में से 42 सीटें मुस्लिम छात्रों को आवंटित करने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े तूफान का संकेत दे रहा है।

इस मुद्दे पर गठित श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति मंगलवार को अपने कोर ग्रुप की बैठक और पत्रकार वार्ता कर जम्मू बंद की तिथि की घोषणा कर आंदोलन की शुरुआत करेगी।

समिति के संयोजक सुखवीर सिंह मनकोटिया पहली बार मीडिया के सामने आकर विवाद पर खुलकर बात रखेंगे। इस बीच, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस विरोध को पूरी तरह अनावश्यक बताया। इसके साथ कई सियासी दलों के इस मुद्दे पर कूदने से यह मामला राजनीतिक रंग लेता जा रहा है।

जम्मू के कई हिंदू, सामाजिक व व्यापारिक संगठनों ने कहा कि मांग पूरी न कर यह मुद्दा फिर श्री अमरनाथ भूमि आंदोलन की तरह जम्मू बनाम कश्मीर बनाने की कोशिश की जा रही है। संघर्ष समिति ने आंदोलन को तेज करने के लिए अपने 15 सदस्यीय कोर ग्रुप का गठन कर दिया है, जिसमें धार्मिक, सामाजिक, व्यापारिक और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।

समिति का कहना है कि 50 में से मात्र आठ सीटें हिंदू छात्रों को आवंटित की गई हैं, जिससे जम्मू क्षेत्र में गहरी नाराजगी है। इसलिए कालेज में सीटें आवंटित करते समय क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि हिंदू छात्रों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया तो आंदोलन तेज होगा।

समिति का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि न्यायसंगत सीट आवंटन के लिए है। 60 से ज्यादा संगठनों के सहयोग से बनी समिति की जिला स्तर पर भी बैठकें हो रही हैं। वहां भी कई संगठन साथ जुड़ रहे हैं और आवाज उठा रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह मामला बड़ा मुद्दा बन सकता है। इस बीच, राष्ट्रीय बजरंग दल सहित कई संगठनों ने प्रदर्शन कर सीटों में हिंदू छात्रों को प्राथमिकता देने की मांग की।

प्रवेश सूची को लेकर बनाया जा रहा विवाद अनावश्यक है। कुछ लोगों को मेरिट आधारित प्रवेश पसंद नहीं। अगर बिना मेरिट प्रवेश चाहिए तो सुप्रीम कोर्ट से इजाजत लें। संविधान धर्म के आधार पर प्रवेश की अनुमति नहीं देता। दाखिले मेरिट के आधार पर होने चाहिए, धर्म के आधार पर नहीं। – उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री

वहीं, बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुनील शर्मा ने कहा कि हमारे विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में उपराज्यपाल से मुलाकात की और आग्रह किया कि केवल सनातन धर्म और माता वैष्णो देवी में आस्था रखने वालों के लिए ही प्रवेश सुनिश्चित किया जाए।

श्रद्धालु श्राइन बोर्ड से सनातन धर्म के विकास की आशा रखते हैं। ऐसे में संस्थान में प्रवेश में इसी भावना का समावेश होना चाहिए।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रविंद्र शर्मा ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता केंद्र में भी भाजपा की सरकार है और जम्मू-कश्मीर में भी उन्हीं के उपराज्यपाल हैं और वही श्राइन बोर्ड के चेयरमैन भी है।

जब श्राइन बोर्ड का मेडिकल कॉलेज बना था तो उस समय क्यों नहीं ऐसा प्रविधान किया गया था। अब इस मामले को क्यों तूल दिया जा रहा है। इसलिए कानून के दायरे में सभी के साथ न्याय होना चाहिए। -रविंद्र शर्मा, प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता

प्रवेश पूरी तरह मेरिट के आधार पर होना चाहिए और इसमें किसी तरह की धार्मिक प्राथमिकता नहीं जोड़ी जानी चाहिए। -जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी

हिंदुओं के चढ़ावे से चल रहे मेडिकल कॉलेज में हिंदू छात्रों की अनदेखी क्यों

संघर्ष समिति के संयोजक सुखवीर सिंह मनकोटिया, ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला लोगों को गुमराह कर रहे हैं। हिंदुओं के चढ़ावे से चलने वाले श्राइन बोर्ड के मेडिकल कालेज में हिंदुओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

देश के अन्य राज्यों में अन्य धर्मों के संस्थानों में भी उनके धर्म के छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है। वैसे भी अन्य समुदाय के छात्रों का खान-पान अलग होता है, जो एक धार्मिक बोर्ड के मेडिकल कालेज में उचित नहीं है।

हिंदुओं के चढ़ावे से चलने वाले श्राइन बोर्ड के मेडिकल कालेज में 50 सीटों में से 42 मुस्लिम छात्रों को देना अनुचित है। चूंकि श्रद्धालु हिंदुओं के धर्म-कर्म के लिए चढ़ावा देते हैं।

कटड़ा के पास स्थित श्राइन बोर्ड के इस मेडिकल कॉलेज में मांस के व्यंजन पर पूरी तरह प्रतिबंध है। लेकिन अन्य समुदाय के छात्रों के खान-पान की आदतें अलग हैं, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी।

अन्य राज्यों में दूसरे समुदाय के संस्थानों में भी उनके छात्रों को प्राथमिकता मिलती है तो यहां क्यों नहीं।

यहां दाखिला प्रक्रिया जम्मू-कश्मीर बोर्ड आफ प्रोफेशनल एंट्रेस एग्जाम द्वारा की गई है। इसकी पहली चयन सूची पर ही बवाल हो गया है।

कुछ दिन पहले तक यहां 36 दाखिले हो चुके हैं, जिनमें अधिकतर मुस्लिम छात्र हैं।

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