हल्द्वानी। पीलीकोठी निवासी दीपक जोशी ने अपने पिता के उपचार के दौरान निजी अस्पताल की कथित लापरवाही के कारण हुई मृत्यु की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
दीपक जोशी के अनुसार, 6 मई 2026 को वह अपने पिता को गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) के ऑपरेशन के लिए नैनीताल रोड स्थित एक निजी अस्पताल लेकर गए थे।
सुबह लगभग 10 बजे अस्पताल पहुंचने के बाद दोपहर 2 बजे उन्हें सर्जिकल वार्ड से ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट किया गया।
प्रारंभ में डॉक्टरों द्वारा दूरबीन विधि (लेप्रोस्कोपिक सर्जरी) से ऑपरेशन शुरू किया गया, लेकिन बाद में परिजनों को बताया गया कि यह प्रक्रिया संभव नहीं है और सामान्य सर्जरी करनी पड़ेगी। इसके लिए उनसे सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करवाए गए।
दीपक जोशी का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान उन्हें बाहर से एक स्टेंट लाने के लिए कहा गया, जिसे तत्काल उपलब्ध कराकर अस्पताल को सौंप दिया गया।
ऑपरेशन के बाद उनके पिता को सर्जिकल वार्ड में शिफ्ट किया गया, जहां उन्हें लगातार दर्द और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि पर्याप्त और समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती गई।
उन्होंने बताया कि 8 मई को उनके पिता ने स्वयं कहा था कि ऑपरेशन सही तरीके से नहीं हुआ है। इसके बाद उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति लगातार खराब होने लगी। डॉक्टरों ने इसे “हॉस्पिटल साइकोसिस” बताते हुए कुछ दिनों में ठीक होने की बात कही, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
परिजनों के अनुसार, बाद में मरीज को आईसीयू तथा विभिन्न वार्डों में स्थानांतरित किया जाता रहा।
इस दौरान फेफड़ों में संक्रमण और अन्य जटिलताओं की जानकारी दी गई। दीपक जोशी का आरोप है कि उन्हें समय पर सही चिकित्सकीय जानकारी नहीं दी गई और लगातार महंगी दवाइयां व मेडिकल उपकरण मंगवाए जाते रहे।
15 मई को अस्पताल प्रशासन ने मरीज की हालत अत्यंत गंभीर बताते हुए वेंटिलेटर पर रखने की अनुमति मांगी।
अगले दिन चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि बचने की संभावना बेहद कम है। 17 मई को जब डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से कोई उम्मीद न होने की बात कही, तब परिवार ने मरीज को घर ले जाने का निर्णय लिया। ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ घर ले जाते समय रास्ते में ही उनके पिता का निधन हो गया।
दीपक जोशी ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकीय स्टाफ की लापरवाही के कारण उनके पिता की जान गई।
उन्होंने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने विशेष रूप से निम्न बिंदुओं की जांच की मांग की है—
जब 8 मई को प्लेटलेट्स लगभग 1,10,000 थीं, तब आवश्यक चिकित्सकीय सतर्कता और उपचार क्यों नहीं किया गया?
8 मई को किए गए विभिन्न परीक्षणों की रिपोर्ट और वास्तविक स्थिति से परिजनों को समय पर अवगत क्यों नहीं कराया गया?
ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ने के बावजूद उचित रेफरल या उच्च स्तरीय उपचार की व्यवस्था समय पर क्यों नहीं की गई?
क्या उपचार प्रक्रिया में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही हुई, जिसके कारण मरीज की मृत्यु हुई?
दीपक जोशी ने कहा कि वह अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए संबंधित सभी विभागों और सक्षम प्राधिकरणों के समक्ष मामला उठाएंगे तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होने तक संघर्ष जारी रखेंगे।
