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हल्द्वानी। राजकीय विद्यालयों में वर्षों से कार्यरत भोजन माताओं को स्थाई किए जाने की मांग को लेकर मंगलवार को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में भोजन माताओं ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान भोजन माताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि वे लंबे समय से बेहद कम मानदेय पर काम कर रही हैं, लेकिन आज तक उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया।

धरने को राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू ने समर्थन देते हुए कहा कि भोजन माताएं शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं और बच्चों को पोषण देने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को भोजन माताओं के साथ न्याय करते हुए उन्हें स्थायी करने की दिशा में ठोस नीति बनानी चाहिए।

हरीश पनेरू ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद भी जिन वर्गों ने शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था को मजबूती दी, वही वर्ग आज सबसे अधिक उपेक्षा का शिकार है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो यह आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले सकता है।

धरना दे रही भोजन माताओं ने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना के अंतर्गत कार्य कर रही हैं, लेकिन न तो उन्हें नियमित वेतन मिलता है और न ही सामाजिक सुरक्षा की कोई व्यवस्था है।

बढ़ती महंगाई के बीच वर्तमान मानदेय से परिवार चलाना बेहद कठिन हो गया है।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि

भोजन माताओं को स्थायी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए,

मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की जाए,

और उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाए।

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में भोजन माताएं मौजूद रहीं। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन भोजन माताओं ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी न होने की स्थिति में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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