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हल्द्वानी। बनभूलपुरा में हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने जमकर पत्थरबाजी से लेकर पेट्रोल बम तक चलाएं। पुलिस-प्रशासन के कई कर्मी हिंसा में घायल हुए तो पांच लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। हिंसा के बाद पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।

आठ फरवरी के दिन वनभूलपुरा क्षेत्र में चलाए गए सत्यापन अभियान के दौरान पुलिस को दर्जन भर लोग ऐसे मिले थे जिनके सत्यापन ही नहीं थे। पुलिस को सभी घरों में छिपे मिले थे। सभी के दस्तावेज जब्त कर उनके खिलाफ चालान की कार्रवाई की थी।

उपद्रव के बाद पुलिस ने उन सभी की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। उपद्रव वाले दिन घटना से पहले दोपहर के समय पुलिस और पीएसी की टीम ने क्षेत्र में सत्यापन अभियान चलाया था।

इस दौरान वहां रह रहे सैकड़ों लोगों के सत्यापन न मिलने की स्थिति में पुलिस ने 69 मकान मालिकों का 6,90,000 रुपये के कोर्ट चालान की कार्रवाई की थी। वहीं बिना सत्यापन के रह रहे 1006 लोगों के खिलाफ पुलिस चालान की कार्रवाई की।

पुलिस को सत्यापन अभियान के तहत वनभूलपुरा स्थित एक मकान में करीब 12 से 14 लोग पानी की टंकी में छिपे मिले थे। पुलिस ने जब उनसे पूछताछ की तो उन्होंने बताया दिहाड़ी-मजदूरी के लिए आने की बात कही थी।

उपद्रव के बाद पुलिस ने उन सभी संदिग्धों की छानबीन शुरू कर दी है। उनके बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस की कई टीमें जगह-जगह आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए दबिश देने में लगी हुई है।

डीएम ने वनभुलपूरा के 127 शस्त्र लाइसेंस किए निलंबित
जिलाधिकारी वंदना सिंह ने वनभूलपुरा में 8 फरवरी को हुई हिंसा को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र के 127 शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिया है। मामले में डीएम ने एसएसपी को 24 घंटे के भीतर सारे लाइसेंसी हथियारों को कब्जे में लिए जाने के निर्देश दिए हैं।

अपर जिला मजिस्ट्रेट फिंचाराम चौहान ने बताया कि वनभूलपुरा के स्थानीय निवासियों अपने निजी लाइसेंसी शस्त्रों का दुरूपयोग कर शस्त्र लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन किया है।

उन्होंने कहा कि वनभूलपुरा में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाए जाने के दौरान शस्त्रों और अवैध हथियारों का उपयोग किया गया। जिससे सैकड़ों पुलिस व प्रशासन के कर्मचारी घायल हो गए थे।

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