पहाड़ी शादियों में बॉलीवुड का तड़का लगाएगा ‘ब्योली नाचली’, रामनगर में श्वेता मेहरा और स्वाति भट्ट ने किया गीत का प्रमोशन
युवाओं और पहाड़ी शादियों को ध्यान में रखकर तैयार हुआ नया गीत, महिला संगीत और दुल्हन की एंट्री के लिए खास अंदाज
रामनगर। उत्तराखंड के लोकगीतों और पहाड़ी संगीत की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। खासकर युवाओं के बीच पहाड़ी गीतों का क्रेज तेजी से देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में उत्तराखंड की प्रसिद्ध कलाकार श्वेता मेहरा और लोकप्रिय लोक गायिका स्वाति भट्ट ने अपना नया गीत ‘ब्योली नाचली’ दर्शकों के बीच पेश किया है। पहाड़ी बोली, आधुनिक संगीत और बॉलीवुड अंदाज के अनोखे मेल से तैयार यह गीत नई पीढ़ी को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
सोमवार को रामनगर में कलाकारों ने अपनी टीम के साथ गीत का प्रमोशन किया और ‘ब्योली नाचली’ की खासियतों के बारे में जानकारी साझा की। कलाकारों का कहना है कि इस गीत के जरिए पहाड़ की लोकभाषा और संस्कृति को आधुनिक संगीत के साथ जोड़कर युवाओं तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
‘ब्योली नाचली’ को विशेष रूप से जेन-जी यानी नई पीढ़ी, महिला संगीत समारोहों और पहाड़ी दुल्हनों की वेडिंग एंट्री को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। गीत में पहाड़ी बोली के साथ बॉलीवुड म्यूजिक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसे पारंपरिक लोकगीतों से अलग और आधुनिक अंदाज देने की कोशिश की गई है।
उत्तराखंड की कलाकार श्वेता मेहरा ने बताया कि इस गीत का विचार उनके अपने संगीत समारोह के दौरान आया था। उस समय उन्होंने भी नहीं सोचा था कि यह छोटा-सा आइडिया आगे चलकर एक म्यूजिक वीडियो का रूप लेगा और आधिकारिक तौर पर रिलीज किया जाएगा। गीत के लिरिक्स और म्यूजिक की जिम्मेदारी निशाद ने संभाली है, जबकि इसे अपनी आवाज लोक गायिका स्वाति भट्ट ने दी है। गीत का वीडियो दिल्ली में शूट किया गया है और इसे महाकाली प्रोडक्शन के तहत लॉन्च किया गया है।
श्वेता मेहरा के मुताबिक, आज पहाड़ी गीतों को युवाओं के बीच काफी पसंद किया जा रहा है। ऐसे में ‘ब्योली नाचली’ में कुछ नया प्रयोग करने का प्रयास किया गया है, ताकि पहाड़ी संगीत की पहचान बरकरार रखते हुए उसे आधुनिक श्रोताओं की पसंद के अनुरूप पेश किया जा सके। उन्होंने बताया कि महिला संगीत से जुड़ा उनका एक और गीत भी जल्द दर्शकों के सामने आने वाला है, जिसमें उत्तराखंड के पहाड़ों की खूबसूरती को प्रमुखता से दिखाया जाएगा।
वहीं प्रसिद्ध लोक गायिका स्वाति भट्ट ने बताया कि ‘ब्योली नाचली’ पहाड़ी बोली में तैयार किया गया है, लेकिन इसका संगीत पारंपरिक लोकगीतों से अलग और आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। उनका उद्देश्य पहाड़ी संगीत को सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित रखने के बजाय देश के दूसरे हिस्सों के श्रोताओं तक भी पहुंचाना है।
स्वाति भट्ट ने उम्मीद जताई कि ‘ब्योली नाचली’ पहाड़ी दुल्हनों की एंट्री, महिला संगीत और शादी समारोहों में लोगों की पसंद बन सकता है। उन्होंने अपने श्रोताओं और संगीत प्रेमियों से नए गीत को प्यार और समर्थन देने की अपील भी की।
कुल मिलाकर, ‘ब्योली नाचली’ उत्तराखंड की लोकभाषा और आधुनिक संगीत के बीच एक नया प्रयोग है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पहाड़ी संस्कृति और बॉलीवुड बीट्स के इस फ्यूजन को युवा वर्ग और शादी समारोहों में कितनी लोकप्रियता मिलती है।

