देहरादून। सेलाकुई में ब्रांडेड कंपनियों के नाम से नकली दवा बनाने वाले रैकेट के सरगना दंपति को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। उसने कोरोना काल के दौरान नकली रेमडेसिविर के इंजेक्शन बनाकर बेचे थे।

दोनों को गुरुवार को पंजाब के जीरकपुर से गिरफ्तार कर दून लाया गया। यहां पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट से दंपति को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।

नकली दवा बनाने वाले इस रैकेट से जुड़े पांच दवा फैक्ट्रियों के मालिक, सप्लायर, दवा रैपर प्रिंट करने में शामिल कुल 12 आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए हैं। पुलिस जांच कर रही है कि नकली दवाएं बनाने में कोई और फैक्ट्री तो शामिल नहीं है।

एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह भुल्लर ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि बीते एक जून को सेलाकुई इंडस्ट्रियल एरिया से ब्रांडेड कंपनी के निकली दवा रैपर, नकली आउटर बॉक्स, लेबल और क्यूआर कोड के साथ आरोपी संतोष कुमार को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद मामले में जांच भी एसटीएफ को ट्रांसफर कर दी गई।

जांच के दौरान रैकेट का संचालन कर रहे नवीन बंसल समेत 10 आरोपी गिरफ्तार किए गए। इनमें पांच दवा फैक्ट्री संचालक हैं। पता चला कि नवीन बंसल के साथ वर्ष 2023 से इस रैकेट का संचालन प्रदीप कुमार और उसकी पत्नी श्रुति डावर निवासी सेक्टर 13/17 पानीपत हरियाणा कर रहे थे।

प्रदीप कुमार ने अपनी पत्नी श्रुति डावर के नाम से एक फर्म साईं फार्मा खोली थी। प्रदीप कुमार और नवीन बंसल मिलकर ब्रांडेड दवाओं के नकली आउटर बॉक्स देहरादून सेलाकुई में संतोष कुमार से बनवाते थे। उसे वी ट्रांस ट्रांसपोर्ट सेलाकुई से भिवाड़ी राजस्थान मंगाते।

दवाओं को पैक कराने के लिए ब्रांडेड मेडिसिन कंपनी नाम के एल्यूमिनियम फॉयल बद्दी हिमाचल के विजय कुमार पाण्डेय की फर्म एवी फायल से बनवाते थे। इनमें पैक करने के लिए दवाएं भी देहरादून सेलाकुई व हरिद्वार फैक्ट्री में बनाई जाती थी। दवाओं की टैबलेट भिवाड़ी मंगाकर वहां पैक की जाती।

इसके बाद पंकज शर्मा की नोबल फार्मेसी पंचकुला की एंबुलेंस की मदद से राज्यों में सप्लाई करते थे। पानीपत हरियाणा में आरोपी प्रदीप कुमार का एक एपी मेडिकोज नाम से मेडिकल स्टोर है। उसके जरिए दवाएं बेचने के साथ उत्तराखंड, यूपी, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा समेत छह राज्यों राज्यों में सप्लाई की।

एसएसपी एसटीएफ नवनीत सिंह ने बताया कि प्रदीप कुमार ने दो साल तक टर्नर रोड पर निजी हॉस्पिटल में पार्टनरशिप में केयर प्वाइंट मेडिकल स्टोर चलाया था। उसमें भी आरोपी ने नकली दवाएं रखकर उनको बेचा। यहां विवाद होने पर वह हिस्सेदारी छोड़कर चला गया था।

दो साल में 14 करोड़ रुपये का लेन-देन

एसटीएफ के मुताबिक जांच के दौरान प्रदीप के बैंक खातों में पिछले दो साल में नकली दवाओं को खरीदने और बेचने के लिए 14 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन हुए। इसके अलावा आरोपी बड़े लेनदेन नकदी में करता था। अब एसटीएफ जांच कर रही है कि आरोपी ने जिन कंपनियों से नकली दवाएं खरीदी, उनमें कोई छूट तो नहीं गई। मुख्य आरोपियों के खातों की ट्रांजेक्शन भी खंगाली जा रही हैं।

कोरोना काल में नकली इंजेक्शन बनाकर बेचे

एसटीएफ के मुताबिक, आरोपी प्रदीप ने 2021 में कोरोना काल में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बनाकर बेचे। इस केस में पानीपत पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जेल से छूटने के बाद आरोपी ने फिर से निकली दवाओं का धंधा नवीन बंसल के साथ शुरू किया।

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