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हल्द्वानी। बागजाला गांव में विकास कार्यों पर वन विभाग द्वारा लगाए जा रहे अवरोधों के विरोध में सोमवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।

अखिल भारतीय किसान महासभा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण डीएफओ तराई पूर्वी कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने वन विभाग और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि बागजाला गांव, जो आजादी से पहले से बसा हुआ है, वहां विकास कार्यों को अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उनके दैनिक जीवन पर गंभीर असर पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि गांव में सड़क, बिजली, पेयजल, सिंचाई नहरों और जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं ठप पड़ी हैं। इसके चलते लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने वन विभाग पर आरोप लगाया कि अतिक्रमण के नाम पर गांव को उजाड़ने की कोशिश की जा रही है, जबकि वर्षों से यहां निवास कर रहे लोगों को पहले बुनियादी सुविधाएं दी जाती रही हैं। अब उन्हीं सुविधाओं पर रोक लगाना अन्यायपूर्ण है।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यह आंदोलन फिलहाल केवल एक चेतावनी है। यदि जल्द ही उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन रूप दिया जाएगा।

ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी आठ सूत्रीय मांगें भी रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से पेयजल योजनाओं को पुनः शुरू करना, सड़कों और सिंचाई नहरों की मरम्मत, बिजली और पानी के नए कनेक्शन जारी करना, गांव में स्ट्रीट लाइट लगाना तथा वन विभाग द्वारा जारी नोटिसों को वापस लेना शामिल है।

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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