उत्तराखंड में सुबह 11 बजे बजेंगे भूकंप अलर्ट के सायरन, घबराएं नहीं; 169 सेंसर और 112 सायरन की होगी टेस्टिंग

देहरादून। उत्तराखंड में शुक्रवार सुबह 11 बजे अचानक सायरन बजने पर लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। यह किसी वास्तविक भूकंप का अलर्ट नहीं, बल्कि भूकंप से पहले चेतावनी देने वाली प्रणाली की जांच के लिए किया जा रहा परीक्षण है। इस दौरान प्रदेशभर में स्थापित सेंसर और सायरन की कार्यक्षमता परखी जाएगी। इसके साथ ही भूदेव (BHUDEV) ऐप का इस्तेमाल करने वाले लोगों के मोबाइल फोन पर भी टेस्ट वार्निंग मैसेज आ सकता है। इस दौरान फोन में वाइब्रेशन और बीप-बीप की आवाज सुनाई देने की संभावना है।

प्रशासन का उद्देश्य इस परीक्षण के माध्यम से लोगों को भूकंप की चेतावनी प्रणाली से परिचित कराना और यह सुनिश्चित करना है कि आपात स्थिति में अलर्ट समय पर लोगों तक पहुंच सके।

भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है उत्तराखंड

उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील राज्य है। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में भूकंप के खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित की जा रही है। इस प्रणाली का उद्देश्य भूकंप की शुरुआती तरंगों का पता लगाकर प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक जल्द से जल्द चेतावनी पहुंचाना है, ताकि वे सुरक्षित स्थान पर जाने या जरूरी सावधानी बरतने का प्रयास कर सकें।

इसी व्यवस्था की प्रभावशीलता जांचने के लिए शुक्रवार सुबह 11 बजे सायरन बजाकर परीक्षण किया जाएगा। ऐसे में सायरन की आवाज सुनने या मोबाइल पर चेतावनी संदेश मिलने पर लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह एक नियोजित मॉक टेस्ट है।

सचिव आपदा प्रबंधन ने बताई टेस्टिंग की वजह

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के मुताबिक, इस परीक्षण का प्रमुख उद्देश्य लोगों को सायरन की आवाज से परिचित कराना है। इससे भविष्य में वास्तविक भूकंप की चेतावनी जारी होने पर लोग सायरन को पहचान सकेंगे और समय रहते सतर्क हो पाएंगे।

उन्होंने बताया कि आपदा के समय चेतावनी प्रणाली का सही ढंग से काम करना बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए यह जांचना जरूरी है कि सेंसर से मिलने वाले संकेतों के आधार पर सायरन और मोबाइल अलर्ट व्यवस्था सुचारु रूप से काम कर रही है या नहीं।

प्रदेश में लगाए गए हैं 169 सेंसर और 112 सायरन

भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत उत्तराखंड में फिलहाल 169 सेंसर और 112 सायरन लगाए गए हैं। शुक्रवार को इन सभी की कार्यक्षमता की जांच की जाएगी। परीक्षण के दौरान यदि किसी स्थान पर सायरन नहीं बजता है या सिस्टम में कोई तकनीकी खामी सामने आती है, तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

इस जांच से विभाग को यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि चेतावनी प्रणाली के कौन-कौन से हिस्से ठीक से काम कर रहे हैं और कहां सुधार की जरूरत है। इसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में चेतावनी प्रसारित करने की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

सेंसर और सायरन की संख्या दोगुनी करने की तैयारी

राज्य सरकार भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत प्रदेश में सेंसर और सायरन की संख्या दोगुनी करने की योजना पर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, लगभग 5 से 10 किलोमीटर के अंतराल पर सेंसर और सायरन स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

यदि इस योजना को निर्धारित रूप में लागू किया जाता है, तो अधिक क्षेत्रों में चेतावनी पहुंचाने और भूकंप के खतरे के प्रति लोगों को समय रहते सतर्क करने में मदद मिल सकती है।

लोगों के लिए जरूरी सूचना

शुक्रवार सुबह 11 बजे सायरन बजने पर लोग इसे भूकंप आने का संकेत समझकर घबराएं नहीं। यह पूर्व निर्धारित परीक्षण है। भूदेव ऐप उपयोगकर्ताओं को मोबाइल पर टेस्ट वार्निंग मैसेज, वाइब्रेशन और बीप की आवाज भी सुनाई दे सकती है।

हालांकि, वास्तविक भूकंप की स्थिति में प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करना जरूरी होगा। इस तरह की टेस्टिंग का मुख्य उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और आपदा के समय जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए चेतावनी प्रणाली को तैयार रखना है।

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