योगी सरकार के साढ़े आठ साल के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था में जो बदलाव आया है, वह आज सिर्फ प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया के लिए एक रोल मॉडल बन चुका है।

पुलिस भर्ती से लेकर प्रशिक्षण, तकनीक से लेकर साइबर और फॉरेंसिक क्षमताओं तक, हर स्तर पर पुलिस को आधुनिक बनाया गया है। ‘यक्ष ऐप’ और ‘स्मार्ट SHO डैशबोर्ड’ जैसी पहलें आम नागरिक को सीधे तौर पर सुरक्षित और सशक्त महसूस करा रही हैं।

लखनऊ में हुए दो दिवसीय ‘पुलिस मंथन’ के समापन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया कि उत्तर प्रदेश की पुलिस अब पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि नए दौर की स्मार्ट, संवेदनशील और सशक्त पुलिसिंग की राह पर आगे बढ़ चुकी है।

वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा किए गए दूरगामी सुधारों और उपलब्धियों के बारे में बात की। उन्होंने कहा, आज उत्तर प्रदेश को वैश्विक स्तर पर एक ‘रोल मॉडल’ के रूप में देखा जा रहा है। यह धारणा केवल दावों पर आधारित नहीं, बल्कि नागरिकों के वास्तविक अनुभवों से बनी है।

सीएम ने “स्मार्ट पुलिसिंग” के अपने दृष्टिकोण को साझा करते हुए, 2017 से भर्ती, प्रशिक्षण, तकनीकि, साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक और पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में लागू किए गए महत्वपूर्ण परिवर्तनों का भी जिक्र किया।

पु‍लिस ट्रेनिंग से लेकर टेक्‍नालॉजी तक में ऐतिहासिक बदलाव

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस मंथन में साफ कहा कि जो उत्तर प्रदेश कभी सीमित संसाधनों और कमजोर प्रशिक्षण के लिए जाना जाता था, आज वहीं प्रदेश अपने दम पर 60 हजार से ज्यादा कांस्टेबलों को आधुनिक प्रशिक्षण दे रहा है। सभी 75 जिलों में साइबर पुलिस स्टेशन, 12 फॉरेंसिक लैब और अलग फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी की स्थापना इस बात का सबूत है कि यूपी पुलिस अब भविष्य को ध्यान में रखकर काम कर रही है।

अपराधियों में डर, जनता में भरोसा

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि यूपी पुलिस ने अपराधियों के मन में डर और आम नागरिकों के दिल में भरोसा पैदा किया है। अब पुलिस सिर्फ घटना होने के बाद हरकत में नहीं आती, बल्कि अपराध से पहले उसे रोकने की रणनीति पर काम करती है। यही वजह है कि कानून-व्यवस्था में यूपी आज मिसाल बन चुका है।

‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर मजबूती से अमल

डीजीपी राजीव कृष्णा ने मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि 2017 से शुरू हुई यह यात्रा ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर टिकी है। सरकार और पुलिस मिलकर नागरिक-केंद्रित सेवाओं को जमीन पर उतार रही है, जिससे आम आदमी को त्वरित न्याय और सुरक्षा मिल रही है।

जमीनी पुलिसिंग को मिला तकनीकी सहारा

एडीजी एस.के. भगत के सत्र में जमीनी स्तर की पुलिसिंग को मजबूत करने पर चर्चा हुई। इसी दौरान मुख्यमंत्री ने ‘यक्ष ऐप’ लॉन्च किया, जो अब पुरानी बीट बुक की जगह लेगा। एआई और बिग डेटा से लैस यह ऐप अपराधियों, संवेदनशील इलाकों और अपराध के पैटर्न की पूरी तस्वीर सामने रखेगा, जिससे पुलिस और ज्यादा सटीक कार्रवाई कर सकेगी।

महिला और बाल सुरक्षा पर खास फोकस

एडीजी पद्मजा चौहान ने मिशन शक्ति केंद्र, जागरूकता कार्यक्रम और फैमिली डिस्प्यूट रेजोल्यूशन क्लिनिक की जानकारी दी। वहीं गोरखपुर जोन के एडीजी अशोक मुथा जैन ने ‘बहू-बेटी सम्मेलन’ के जरिए समाज में सुरक्षा और सम्मान का माहौल बनाने की पहल साझा की।

थाना स्तर पर स्मार्ट मैनेजमेंट

डीजी सुजीत पांडेय ने ‘स्मार्ट SHO डैशबोर्ड’ पेश किया, जिससे थानों में शिकायत निस्तारण तेज होगा, जवाबदेही बढ़ेगी और अपराध व ट्रैफिक की निगरानी आसान होगी। यह सिस्टम पुलिस स्टेशन को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

साइबर अपराध से निपटने की नई ताकत

डीजी बिनोद कुमार सिंह ने बताया कि I4C के सहयोग से साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की क्षमता लगातार बढ़ाई जा रही है। साइबर हेल्प डेस्क अब डिजिटल ठगों और ऑनलाइन अपराधों से निपटने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

पुलिसकर्मियों के कल्याण पर भी ध्यान

डीजी राजीव सभरवाल ने बताया कि व्यवहार सुधार, स्वास्थ्य योजनाएं और i-GOT पोर्टल से ऑनलाइन ट्रेनिंग पर जोर दिया जा रहा है। महिला सशक्तिकरण के लिए ‘वमासारथी’ जैसी पहलें भी पुलिस बल को और मजबूत बना रही हैं।

अभियोजन और जेल व्यवस्था में भी सुधार

डीजी दीपेश जुनेजा ने माफियाओं की निगरानी के लिए ई-रिपोर्टिंग पोर्टल और अभियोजकों के लिए नए KPI की जानकारी दी।

डीजी प्रेम चंद मीणा ने बताया कि जेलों में AI आधारित CCTV, हेल्थ ATM और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से 50 हजार से ज्यादा पेशियां कराई जा चुकी हैं।

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