नैनीताल के खुर्पाताल में ग्रामीणों का तीसरे दिन शराब की दुकान को लेकर धरना प्रदर्शन जारी रहा मधुशाला नहीं पाठशाला चाहिए शराब नहीं रोजगार चाहिए ग्रामीणों ने अपना विरोध जताया

रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला

नैनीताल। खुर्पाताल क्षेत्र में प्रस्तावित शराब की दुकान के विरोध में आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। मंगोली के बाद बजून में भी क्षेत्रवासियों ने “शराब नहीं रोजगार चाहिए, मधुशाला नहीं पाठशाला चाहिए” जैसे नारों के साथ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन में खासतौर पर महिला शक्ति की एकजुटता देखने को मिली। सभी ने एक सुर में सरकार और प्रशासन से मांग की कि क्षेत्र में किसी भी हालत में शराब की दुकान न खोली जाए। इस दौरान क्षेत्रवासियों का प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिला और ज्ञापन सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया।
इसी बीच कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत के खुर्पाताल दौरे से लौटते समय ग्रामीणों ने उनका काफिला रोककर अपनी समस्या रखी। कमिश्नर ने मामले में संज्ञान लेने का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार जहां एक ओर पहाड़ों में स्कूल बंद कर रही है, वहीं दूसरी ओर गांवों में शराब की दुकानें खोल रही है। महिलाओं ने कहा कि क्षेत्र में न अस्पताल है, न रोजगार के साधन, लेकिन शराब की दुकान खोलकर युवाओं के भविष्य को खतरे में डाला जा रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। साथ ही 2027 और 2029 के चुनावों के बहिष्कार तक की बात कही गई। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर राज्यभर में सरकार के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि जहां शराब की दुकान खोली जा रही है, वह मुख्य बाजार है, जहां से रोज छात्राएं और महिलाएं गुजरती हैं। ऐसे में इससे असुरक्षा और सामाजिक दुष्प्रभाव बढ़ने की आशंका है।
प्रदर्शन में जिला पंचायत उपाध्यक्ष देवकी बिष्ट समेत कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में महिलाएं व ग्रामीण मौजूद रहे।

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