ओखलकांडा के अधौड़ा गांव का वीडियो वायरल; सड़क नहीं बनी तो 2027 चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
भीमताल/ओखलकांडा। उत्तराखंड में विकास और गांवों तक सड़क पहुंचाने के तमाम दावों के बीच पहाड़ की बदहाल जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है।
भीमताल विधानसभा क्षेत्र के ओखलकांडा ब्लॉक स्थित अधौड़ा गांव से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ग्रामीण एक बीमार महिला को डोली में लिटाकर करीब आठ किलोमीटर तक पथरीले और दुर्गम पहाड़ी रास्ते से सड़क तक पहुंचाते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो ने आजादी के 80 साल और उत्तराखंड राज्य गठन के 25 साल बाद भी सड़क सुविधा से वंचित पहाड़ी गांवों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधौड़ा गांव के कई तोक आज भी सड़क मार्ग से नहीं जुड़े हैं, जिसके कारण बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
चार ग्रामीणों ने डोली में महिला को पहुंचाया सड़क तक
वायरल वीडियो में चार ग्रामीण एक बीमार महिला को डोली के सहारे उबड़-खाबड़ और पथरीली पहाड़ी पगडंडी से ले जाते नजर आ रहे हैं। रास्ते में खड़ी चढ़ाई, जंगल की झाड़ियां और दुर्गम पगडंडियां ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ाती दिखाई देती हैं।
जानकारी के अनुसार गांव की एक महिला के पैर में फोड़ा होने के कारण वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गई थी। ऐसे में ग्रामीणों ने उसे डोली में लिटाया और करीब आठ किलोमीटर पैदल चलकर सड़क मार्ग तक पहुंचाया। इसके बाद महिला को उपचार के लिए आगे ले जाया गया। उपचार के बाद वह स्वस्थ होकर वापस गांव लौट आई।
मौडा, कुनरा और धमोरी तोक आज भी सड़क से दूर
ग्रामीणों के अनुसार अधौड़ा गांव के मौडा, कुनरा और धमोरी समेत कई तोकों में रहने वाले लोग आज भी सड़क सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे हैं। किसी व्यक्ति के अचानक बीमार पड़ने या गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने की स्थिति में ग्रामीणों को कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है।
गंभीर मरीजों को डोली, स्ट्रेचर या डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, क्योंकि पहाड़ी रास्ते फिसलन भरे और खतरनाक हो जाते हैं।
केशवी देवी की तबीयत बिगड़ने पर फिर सामने आई परेशानी
रविवार को गांव की रहने वाली केशवी देवी, पत्नी हयात सिंह, की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें उपचार के लिए हल्द्वानी ले जाने के दौरान परिजनों और ग्रामीणों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। सड़क तक पहुंचने के लिए लंबा और दुर्गम पैदल सफर करना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी गंभीर मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ जाए तो सड़क सुविधा नहीं होने के कारण समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कभी-कभी मरीज की जान पर भी खतरा बन सकता है।
वायरल वीडियो बनाने वाले समाजसेवी ने उठाए सवाल
वायरल वीडियो बनाने वाले समाजसेवी दीपक सिंह मेहरा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से इस तस्वीर को देखने की अपील की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गांवों के विकास और सड़क सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, तो पहाड़ के लोगों को आज भी बीमारों को डोली में रखकर कई किलोमीटर तक पैदल क्यों ले जाना पड़ रहा है।
दीपक मेहरा का कहना है कि ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
विधायक और सांसद से कई बार लगाई गुहार
ग्रामीणों के मुताबिक सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार क्षेत्रीय विधायक और सांसद सहित संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई जा चुकी है। बावजूद इसके गांव के इन तोकों तक सड़क पहुंचाने की दिशा में ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंचने का माध्यम भी है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सड़क नहीं बनी तो 2027 विधानसभा चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी
अब ग्रामीणों का धैर्य जवाब देने लगा है। गांव के युवाओं और स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि लंबे समय से लंबित सड़क निर्माण की मांग जल्द पूरी नहीं की गई तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से आश्वासन मिलते रहे हैं, लेकिन सड़क की समस्या जस की तस बनी हुई है। उनका सवाल है कि आखिर पहाड़ के इन दूरस्थ गांवों तक विकास की सड़क कब पहुंचेगी।
अधौड़ा गांव का वायरल वीडियो एक बार फिर उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच मौजूद अंतर को उजागर कर रहा है। ग्रामीणों की मांग साफ है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि गांव तक पहुंचने वाली सड़क चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बीमार व्यक्ति को उपचार के लिए आठ किलोमीटर तक डोली में ढोने की मजबूरी न रहे।










