नैनीताल मॉ नंदा सुनंदा देवी विराजमान हुई सिंहासन में हजारों भक्तों ने किए मां के दर्शन
रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला
नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में आस्था और भक्ति का सबसे बड़ा पर्व माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव अपने चरम पर पहुंच गया है। शनिवार तड़के ब्रह्ममुहूर्त में विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ माँ नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की गई।
इसके बाद माँ को माँ नयना देवी मंदिर परिसर में विराजमान कर दिया गया और देश-दुनिया से दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए माँ का दरबार खोल दिया गया। माँ के दर्शन कर भक्तों ने जयकारे लगाए और सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना की।
माँ नंदा-सुनंदा के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और ‘जय माँ नंदा’, ‘जय माँ सुनंदा’ के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर माँ के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।
कदली वृक्ष लाने के साथ शुरू हुआ था महोत्सव
नैनीताल का ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव बीती 16 सितंबर को कदली वृक्ष लाने वाली टोली के रवाना होने के साथ शुरू हुआ था। श्री राम सेवक सभा की ओर से भक्तों की टोली को माँ नंदा-सुनंदा की प्रतिमा निर्माण में उपयोग होने वाले कदली वृक्ष लेने के लिए विधिवत पूजा-अर्चना के बाद रवाना किया गया था।
इसके बाद टोली 17 सितंबर को कदली वृक्ष लेकर नैनीताल वापस लौटी, जहां श्रद्धालुओं और आयोजकों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। कदली वृक्षों को माँ की प्रतिमा निर्माण स्थल तक पहुंचाने के बाद कलाकारों और श्रद्धालुओं की देखरेख में माँ नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं का निर्माण शुरू किया गया।
पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल तरीके से तैयार हुई प्रतिमाएं
माँ नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं को पारंपरिक स्वरूप के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए ईको फ्रेंडली तरीके से तैयार किया गया है। प्रतिमा निर्माण में कदली वृक्ष, बाँस, घास, रूई, कपड़े तथा प्राकृतिक रंगों समेत अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
नैनीताल में आयोजित होने वाला यह महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ ही कुमाऊं की लोक परंपरा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण की भावना को भी प्रदर्शित करता है।
चारों पहर होगी माँ की पूजा-अर्चना
प्राण प्रतिष्ठा के बाद माँ नंदा-सुनंदा के दरबार में अगले कई दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना का क्रम जारी रहेगा। श्रद्धालु चारों पहर माँ की पूजा और दर्शन कर सकेंगे। महोत्सव के दौरान नैनीताल समेत आसपास के क्षेत्रों और दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
माँ नंदा को कुमाऊं और विशेष रूप से पर्वतीय समाज की आराध्या देवी के रूप में विशेष श्रद्धा प्राप्त है। मान्यता के अनुसार माँ नंदा चंद्रवंशीय राजाओं की कुलदेवी भी रही हैं। यही कारण है कि माँ नंदा-सुनंदा के प्रति लोगों की आस्था पीढ़ियों से जुड़ी हुई है।
23 सितंबर को होगा माँ का नगर भ्रमण और विसर्जन
माँ नंदा-सुनंदा के दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद महोत्सव के अंतिम चरण में माँ की भव्य विदाई की जाएगी। 23 सितंबर को माँ नंदा-सुनंदा की शोभायात्रा नगर भ्रमण करेगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। नगर भ्रमण के बाद माँ की प्रतिमाओं का नैनीझील में विधि-विधान के साथ विसर्जन किया जाएगा।
माँ की विदाई के दौरान पूरा नैनीताल भक्तिमय हो उठेगा और श्रद्धालु भावुक होकर अपनी आराध्या को अगले वर्ष फिर आने का निमंत्रण देंगे।
नंदामय हुआ सरोवर नगरी का माहौल
माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव के चलते इन दिनों पूरी सरोवर नगरी नंदामय नजर आ रही है। मंदिर परिसर से लेकर नगर के विभिन्न हिस्सों तक धार्मिक आयोजन, पूजा-अर्चना और घंटियों की गूंज सुनाई दे रही है। माँ के दर्शन के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से श्रद्धालु नैनीताल पहुंच रहे हैं।
माँ नंदा-सुनंदा के प्रति लोगों की अगाध आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महोत्सव के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु नैनीताल पहुंचकर माँ के दरबार में शीश नवाते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माँ नंदा-सुनंदा की कृपा से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
फिलहाल, माँ नंदा-सुनंदा के जयकारों और मंदिर की घंटियों से नैनीताल का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। श्रद्धालुओं के लिए माँ का दरबार खुलने के साथ ही महोत्सव का धार्मिक उल्लास और बढ़ गया है।


























