नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) ने शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत संविदा प्राध्यापकों के वेतन को यूजीसी के नियमानुसार ₹57,700 प्रतिमाह किए जाने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को ज्ञापन भेजा है। कूटा ने इस संबंध में शीघ्र शासनादेश जारी करने की मांग की है।
कूटा का कहना है कि यूजीसी की ओर से संविदा प्राध्यापकों के वेतन को लेकर कई वर्ष पूर्व आदेश जारी किया जा चुका है। संगठन के अनुसार उक्त व्यवस्था को देश के कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में लागू किया जा चुका है।
इसके अलावा हरियाणा सरकार तथा जम्मू-कश्मीर में भी यूजीसी के प्रावधानों के अनुरूप वेतन व्यवस्था लागू किए जाने की बात कूटा ने ज्ञापन में कही है।
कूटा पदाधिकारियों ने कहा कि संविदा प्राध्यापक लंबे समय से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें यूजीसी के अनुरूप वेतन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। संगठन ने सरकार से इस मामले में शीघ्र समुचित निर्णय लेते हुए शासनादेश जारी करने की मांग की है, ताकि संविदा प्राध्यापकों को निर्धारित वेतन का लाभ मिल सके।
इसके साथ ही कूटा ने ‘समान कार्य, समान वेतन’ के सिद्धांत को सभी कार्यालयों में लागू करने की मांग भी उठाई है। संगठन ने कहा कि लंबे समय से संविदा और अन्य अस्थायी व्यवस्था के तहत सेवाएं दे रहे कार्मिकों के हितों पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। कूटा ने 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके संविदा कार्मिकों को नियमित किए जाने की मांग भी ज्ञापन के माध्यम से रखी है।
कूटा ने बैंक संघ की विभिन्न मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से उनकी लंबित मांगों पर भी शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने और आवश्यक आदेश जारी करने का आग्रह किया है। संगठन ने कहा कि लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान होने से कर्मचारियों और कार्मिकों को राहत मिल सकेगी।
ज्ञापन भेजने वालों में कूटा अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी, प्रो. नीलू, डॉ. दीपक, डॉ. युगल, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. कुबेर गिनती, डॉ. शिवांगी, डॉ. अनिल बिष्ट, डॉ. दीपिका और डॉ. अशोक सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।





































