अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय की एलएलबी प्रवेश प्रक्रिया में अचानक किए गए बदलाव को लेकर अभ्यर्थियों में असमंजस और नाराजगी की स्थिति बन गई है।
विश्वविद्यालय की ओर से पहले जारी अधिसूचना के आधार पर हजारों अभ्यर्थियों ने लिखित प्रवेश परीक्षा की तैयारी करते हुए आवेदन किया था, लेकिन परीक्षा से ठीक तीन दिन पहले वेबसाइट पर नया नोटिफिकेशन जारी कर प्रवेश परीक्षा समाप्त कर मेरिट के आधार पर प्रवेश देने की व्यवस्था की गई है। अभ्यर्थियों ने इस बदलाव पर सवाल उठाते हुए मूल अधिसूचना के अनुसार लिखित प्रवेश परीक्षा कराने की मांग की है।
11 सितंबर की अधिसूचना के आधार पर शुरू हुई थी आवेदन प्रक्रिया
अभ्यर्थियों के अनुसार सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय की ओर से 11 सितंबर को एलएलबी प्रवेश परीक्षा को लेकर अधिसूचना जारी की गई थी। इसके आधार पर 13 सितंबर से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई। आवेदन की अंतिम तिथि 28 सितंबर निर्धारित की गई थी, जबकि प्रवेश परीक्षा 4 अक्टूबर को आयोजित होनी थी।
प्रवेश परीक्षा की तारीख निर्धारित होने के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा को आधार मानते हुए एलएलबी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन किया। कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी थी। उनका कहना है कि आवेदन प्रक्रिया पूरी होने और परीक्षा में कुछ ही दिन शेष रहने के बाद प्रवेश व्यवस्था में बदलाव किए जाने से उन्हें अचानक नई स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
परीक्षा से तीन दिन पहले आया नया नोटिफिकेशन
अभ्यर्थियों का कहना है कि 1 अक्टूबर को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अचानक नया नोटिफिकेशन जारी किया गया, जिसमें अब लिखित प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं किए जाने और अभ्यर्थियों को स्नातक अथवा निर्धारित शैक्षणिक अंकों के आधार पर मेरिट से प्रवेश देने की व्यवस्था की जानकारी दी गई है।
यही निर्णय अभ्यर्थियों के बीच सबसे बड़ा सवाल बन गया है। उनका कहना है कि जब आवेदन की अंतिम तिथि 28 सितंबर को समाप्त हो चुकी है और हजारों अभ्यर्थी प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन कर चुके हैं, तब परीक्षा से महज तीन दिन पहले नियम बदलना उचित प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करता है।
दोबारा आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने से भी बढ़ी चिंता
अभ्यर्थियों के मुताबिक नए नोटिफिकेशन के साथ दोबारा आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि पहले से आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं बताई गई है, लेकिन उनका कहना है कि नए सिरे से आवेदन की व्यवस्था से प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा में अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ सकती है।
अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि एलएलबी में प्रवेश मेरिट के आधार पर दिया जाना था तो यह व्यवस्था शुरुआत में ही स्पष्ट की जानी चाहिए थी। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों ने प्रवेश परीक्षा को ध्यान में रखकर तैयारी और अन्य व्यवस्थाएं की थीं।
पुराने स्नातकों के लिए लिखित परीक्षा को बताया समान अवसर का माध्यम
अभ्यर्थियों का कहना है कि एलएलबी में प्रवेश लेने के इच्छुक सभी अभ्यर्थी हाल ही में 12वीं या स्नातक करने वाले नहीं हैं। बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी भी हैं जिन्होंने अपनी स्नातक शिक्षा कई वर्ष पहले पूरी की है और अब कानून की पढ़ाई करना चाहते हैं।
ऐसे अभ्यर्थियों का कहना है कि लिखित प्रवेश परीक्षा उनके लिए अपनी वर्तमान तैयारी और योग्यता प्रदर्शित करने का एक समान अवसर प्रदान करती। केवल पुराने शैक्षणिक अंकों के आधार पर मेरिट तैयार होने की स्थिति में लंबे समय बाद पढ़ाई में लौटने वाले अभ्यर्थियों की स्थिति अलग हो सकती है।
₹2 हजार आवेदन शुल्क का भी उठाया सवाल
अभ्यर्थियों ने प्रवेश प्रक्रिया के लिए जमा किए गए ₹2,000 आवेदन शुल्क को लेकर भी विश्वविद्यालय से स्पष्ट जानकारी मांगी है। उनका कहना है कि सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों के लिए यह राशि महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया के मूल स्वरूप में बदलाव किए जाने के बाद पूर्व में जमा शुल्क और पहले आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों के संबंध में विश्वविद्यालय को स्पष्ट स्थिति बतानी चाहिए।
उच्च शिक्षा विभाग से शिकायत, प्रक्रिया की समीक्षा की मांग
इस मामले में आवेदक आदित्य वर्धन सिंह बिष्ट ने उच्च शिक्षा विभाग के समक्ष शिकायत भेजकर प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा करने का अनुरोध किया है। शिकायत में प्रवेश परीक्षा को लेकर पहले जारी अधिसूचना और उसके आधार पर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का पक्ष रखा गया है।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि किसी प्रशासनिक या अन्य कारण से प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकती है तो विश्वविद्यालय की ओर से नियम बदलने के कारण और उसका आधार सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए।
अभ्यर्थियों की मांग—मूल अधिसूचना के अनुसार हो परीक्षा
अभ्यर्थियों ने मांग की है कि पहले जारी अधिसूचना के अनुसार 4 अक्टूबर को प्रस्तावित एलएलबी प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाए। उनका कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में बदलाव से उन अभ्यर्थियों के हित प्रभावित हो सकते हैं जिन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से घोषित व्यवस्था पर भरोसा करते हुए आवेदन किया था।
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी विशेष अभ्यर्थी या वर्ग के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि उनकी मुख्य चिंता पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया, पूर्व सूचना और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराने की है।
अब निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग के रुख पर हैं। परीक्षा में महज कुछ दिन शेष रहने के बीच अचानक बदली गई प्रवेश व्यवस्था को लेकर विश्वविद्यालय की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है और क्या 4 अक्टूबर की प्रस्तावित प्रवेश परीक्षा को लेकर कोई नया निर्णय लिया जाता है, इस पर अभ्यर्थियों की नजर बनी हुई है।





































