बेतालघाट में कोसी नदी में डूबे 16 वर्षीय किशोर का तीन दिन बाद शव बरामद, एसडीआरएफ ने चलाया सघन सर्च ऑपरेशन
रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला।
नैनीताल। बेतालघाट क्षेत्र में कोसी नदी में डूबकर लापता हुए 16 वर्षीय किशोर का शव तीन दिन बाद एसडीआरएफ की टीम ने सघन खोज अभियान के दौरान बरामद कर लिया। शव मिलने की सूचना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम बिनकोट, बेतालघाट निवासी दीपक कुमार पुत्र भुवन चंद्र, उम्र 16 वर्ष, कोसी नदी में डूबने के बाद लापता हो गया था। घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ पोस्ट खैरना की टीम मौके पर पहुंची और किशोर की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
उप निरीक्षक मनीष भाकुनी के नेतृत्व में एसडीआरएफ टीम ने नदी के किनारे और आसपास के क्षेत्रों में लगातार सघन खोजबीन की। टीम द्वारा घटनास्थल से नदी के किनारे करीब सात किलोमीटर क्षेत्र में व्यापक सर्चिंग की गई। लगातार तीन दिनों तक चले अभियान के बाद एसडीआरएफ को किशोर का शव बरामद करने में सफलता मिली।
शव बरामद होने के बाद पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने आवश्यक कार्रवाई शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए नैनीताल भेजा गया। देर रात बेतालघाट से नैनीताल तक शव ले जाने में भी परिजनों और पुलिस टीम को परेशानियों का सामना करना पड़ा। क्षेत्र में परिवहन की पर्याप्त सुविधा नहीं होने और दुर्गम एवं ऊबड़-खाबड़ रास्ते के चलते शव को नैनीताल लाने में काफी समय लगा।
परिवार से मिले कांग्रेस नेता शीलू कुमार, हरसंभव मदद का भरोसा
घटना की जानकारी मिलने के बाद समाजसेवी एवं कांग्रेस नेता शीलू कुमार भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और इस दुख की घड़ी में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। देर रात शव को पोस्टमार्टम के लिए नैनीताल लाने में भी शीलू कुमार अपने साथियों के साथ पुलिस टीम के सहयोग में मौजूद रहे।
बताया गया कि स्थानीय पुलिस प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम ने गोताखोरों की मदद से कोसी नदी में लगातार गहन खोज अभियान चलाया। तीन दिन तक चले अभियान के बाद किशोर का शव बरामद होने से परिवार को जहां अपने बेटे का अंतिम दीदार हुआ, वहीं उसकी मौत से पूरा परिवार सदमे में है।
हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भी शोक और आक्रोश का माहौल है। परिजनों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराने की मांग की है, ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियां पूरी तरह स्पष्ट हो सकें।
हादसे ने क्षेत्र में एक बार फिर नदी-नालों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और ऐसे स्थानों पर आवश्यक सतर्कता के सवाल खड़े कर दिए हैं।

