राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में ‘आर्टिस्ट इन रेजिडेंस’ कार्यक्रम में उत्तराखंड की ऐपण कला का शानदार प्रदर्शन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेंट की गई स्वनिर्मित लक्ष्मी चौकी

नैनीताल/हल्द्वानी। देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक लोककला ऐपण को राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर बड़ी पहचान मिली है।

उत्तराखंड की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत अब देश के ऐतिहासिक राष्ट्रपति भवन में अपनी विशिष्ट पहचान के साथ दिखाई देगी।

नैनीताल निवासी राष्ट्रीय पुरस्कार एवं उत्तराखंड शिल्प रत्न से सम्मानित ऐपण कलाकार मंजू रौतेला और हल्द्वानी निवासी कलाकार हेमलता कबडवाल ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में उत्तराखंड की लोककला का प्रभावशाली प्रतिनिधित्व कर पूरे कुमाऊं और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित ‘आर्टिस्ट इन रेजिडेंस’ कार्यक्रम में देश के छह राज्यों से चयनित लोककला के जानकार और पारंपरिक कलाकारों को आमंत्रित किया गया था।

इस आयोजन में विभिन्न राज्यों की समृद्ध लोककलाओं, पारंपरिक चित्रकारी और सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया। उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान मानी जाने वाली ऐपण कला को भी इस महत्वपूर्ण आयोजन में स्थान मिला।

मंजू रौतेला और हेमलता कबडवाल ने एक टीम के रूप में अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए कैनवास पर उत्तराखंड की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विशेषताओं को उकेरा।

मंजू रौतेला ने बताया कि राष्ट्रपति भवन में 22 अक्टूबर से 6 नवंबर तक आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे कलाकारों ने अपनी-अपनी पारंपरिक कला शैलियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता को प्रदर्शित किया।

कार्यक्रम की विशेष थीम ‘विकसित भारत 2047’ रखी गई थी। राष्ट्रपति सचिवालय के कला एवं संग्रहालय अनुभाग की ओर से आयोजित इस पहल का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विकास की परिकल्पना को लोककलाओं के माध्यम से प्रस्तुत करना था।

इस आयोजन का एक विशेष और गौरवपूर्ण क्षण उस समय आया, जब ऐपण कलाकार मंजू रौतेला ने अपनी पारंपरिक कला से स्वयं तैयार की गई लक्ष्मी चौकी देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को भेंट की।

यह भेंट केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि उत्तराखंड की धार्मिक आस्था, शुभता, समृद्धि और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक रही। राष्ट्रपति को ऐपण कला से निर्मित लक्ष्मी चौकी भेंट कर मंजू रौतेला ने देवभूमि की लोक संस्कृति को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचाने का गौरव हासिल किया।

उत्तराखंड की ऐपण कला विशेष रूप से कुमाऊं क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। घरों की देहरी, पूजा स्थल, धार्मिक अनुष्ठानों, त्योहारों और मांगलिक अवसरों पर बनाई जाने वाली ऐपण कलाकृतियां यहां की लोक आस्था और पारंपरिक जीवनशैली को दर्शाती हैं।

चावल के बिस्वार और गेरू के पारंपरिक प्रयोग से तैयार होने वाली इस कला में धार्मिक प्रतीकों, ज्यामितीय आकृतियों और शुभ चिह्नों का विशेष महत्व है।

मंजू रौतेला ने इस महत्वपूर्ण आयोजन के सफल संचालन और कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करने के लिए राष्ट्रपति सचिव आईएएस दीप्ति उमाशंकर, राष्ट्रपति भवन के डिप्टी डायरेक्टर पंकज प्रवीण बदलोई, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, राष्ट्रपति भवन से जुड़ी स्वाति शाही, क्यूरेटर कोमल पांडे, आईजीएनसीए की डॉ. ऋचा कंबोज तथा श्रद्धा त्रिवेदी गजबर का आभार व्यक्त किया।

कुल मिलाकर राष्ट्रपति भवन में उत्तराखंड की ऐपण कला की उपस्थिति और राष्ट्रपति को लक्ष्मी चौकी भेंट किया जाना प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। मंजू रौतेला और हेमलता कबडवाल ने अपनी कला साधना से यह साबित किया है कि उत्तराखंड की पारंपरिक लोककलाओं में न केवल सांस्कृतिक गहराई है, बल्कि वे आधुनिक भारत की पहचान और विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को भी खूबसूरती से अभिव्यक्त करने की क्षमता रखती हैं।

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