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दूध का कारोबार और भारतीय अर्थव्यवस्था, डेयरी उत्पादन में तेजी से बढ़ रहा रोजगार की संभावनाएं

संसद में अंतरिम बजट प्रस्तुत करते हुए वित्तमंत्री ने देश में दुग्ध और डेयरी उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। भारत का दूध उत्पादन 2022-23 में चार फीसद बढ़कर 23.058 करोड़ टन हो गया है। बावजूद इसके, इसकी निरंतर बढ़त बनाए रखने के लिए प्रभावी उपाय करने जरूरी हैं, क्योंकि दूध और उसके सह-उत्पाद से ग्रामीण क्षेत्रों में न केवल बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होता, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी काफी बल मिलता है।

कुछ समय पहले आई पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की रपट के अनुसार भारत दूध उत्पादन में दुनिया में पहले पायदान पर है। विश्व के कुल दूध उत्पादन में भारत चौबीस फीसद का योगदान देता है।

सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में दुग्ध क्रांति के बाद बढ़ा उत्पादन

वैसे तो भारत में दूध पशुपालक उत्पादित करते हैं। उनका यह परंपरागत धंधा है, जिसे वे ज्ञान परंपरा से जानते-सीखते हैं। पर सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में हुई श्वेत या दुग्ध क्रांति के बाद दुग्ध उत्पादन पर जोर बढ़ गया। 1946 में उन्होंने मोरारजी देसाई और त्रिभुवन दास पटेल की सहायता से भारत की पहली दुग्ध सहकारी संस्था की स्थापना की, जिसे बाद में जिला सहकारी दुग्ध उत्पादन संघ के नाम से जाना गया। ढाई सौ लीटर प्रतिदिन दूध का कारोबार करने वाली इसी संस्था को आज ‘अमूल’ के नाम से जाना जाता है। देश में दूध का सत्तर फीसद कारोबार असंगठित ढांचा संभाल रहा है। इसमें ज्यादातर लोग अशिक्षित हैं। मगर पारंपरिक ज्ञान से वे बड़ी मात्रा में दुग्ध उत्पादन में सफल हैं।

देश में दूध का तीस फीसद कारोबार डेयरियों के माध्यम से होता है

दूध का तीस फीसद कारोबार संगठित ढांचा, मसलन डेयरियों के माध्यम से होता है। देश में छियानबे हजार सहकारी संस्थाएं दूध उत्पादन से जुड़ी हैं। चौदह राज्यों की अपनी सहकारी दुग्ध संस्थाएं हैं। देश में कुल कृषि खाद्य उत्पाद और दूध उत्पादन से जुड़ी प्रसंस्करण सुविधाएं महज दो फीसद हैं। मगर वह दूध ही है, जिसका सबसे ज्यादा प्रसंस्करण करके दही, मट्ठा, घी, मक्खन, मावा, पनीर आदि बनाए जाते हैं। इस कारोबार से आठ करोड़ से भी ज्यादा लोगों की आजीविका जुड़ी है। इसमें ग्रामीण महिलाओं की अहम भूमिका रहती है।

वर्ष 2013-14 के दौरान देश में 1463 लाख टन दूध उत्पादन हुआ था, जो 2022-23 में बढ़ कर 2306 लाख टन हो गया है। भारत में प्रति वर्ष दूध उत्पादन 5.9 फीसद से ज्यादा की दर से बढ़ रहा है, जबकि दुनिया में दूध की औसत वृद्धि प्रति वर्ष मात्र दो फीसद है। करीब डेढ़ सौ देशों में भारत के सह-दुग्ध उत्पादों की मांग है। पिछले वर्ष पैंसठ लाख टन दुग्ध उत्पाद का निर्यात हुआ था। केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री का कहना है कि देश की अर्थव्यस्था में डेयरी क्षेत्र का योगदान पांच फीसद है और यह लगभग आठ करोड़ लोगों के रोजगार का बारहमासी मजबूत साधन है।

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